चाईबासा के गुरमुख सिंह खोखर अपनी 1933 की ब्रिटिश ऑस्टिन कार (ORM 108) के साथ कोलकाता स्टेटसमैन विंटेज रैली के लिए रवाना हुए। एसडीओ संदीप अनुराग टोप्पो ने दिखाई हरी झंडी।
Chaibasa (चाईबासा): चाईबासा की सड़कों पर जब 1933 की एक ऐतिहासिक कार गुजरी, तो हर कोई उसे देखता रह गया। मौका था सुप्रसिद्ध ‘स्टेटसमैन विंटेज कार एवं क्लासिक कार रैली’ में भागीदारी का। चाईबासा के गौरव और विंटेज कारों के शौकीन गुरमुख सिंह खोखर एक बार फिर अपनी प्रतिष्ठित 1933 ब्रिटिश मेक ऑस्टिन कार (पंजीयन संख्या- ORM 108) के साथ कोलकाता के लिए रवाना हुए हैं।

एसडीओ ने हरी झंडी दिखाकर दी शुभकामनाएं
सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) श्री संदीप अनुराग टोप्पो ने इस ऐतिहासिक कार को हरी झंडी दिखाकर आधिकारिक रूप से रवाना किया। इस दौरान उन्होंने गुरमुख सिंह खोखर और उनकी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह चाईबासा के लिए गर्व की बात है कि यहाँ की ऐतिहासिक विरासत राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जिले का प्रतिनिधित्व कर रही है। इस मौके पर उनके साथ रसिक लाल टांक, रौनक सिंह खोखर और सुखबीर सिंह खोखर भी कोलकाता के लिए प्रस्थान कर चुके हैं।
32 बार जीत का अद्भुत रिकॉर्ड
चाईबासा विंटेज कार रैली कोलकाता के सफर में गुरमुख सिंह खोखर का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वे वर्ष 1992 से लगातार इस प्रतिष्ठित रैली में भाग लेते आ रहे हैं। उनकी मेहनत और कार के प्रति उनके समर्पण का ही परिणाम है कि उन्होंने अब तक विभिन्न श्रेणियों में 32 बार जीत हासिल की है। विदित हो कि कोरोना काल के दौरान यह रैली आयोजित नहीं हो सकी थी, जिसके बाद अब एक बार फिर उत्साह के साथ वे मैदान में उतर रहे हैं।
पाराट्रूप फोल्डिंग बाइक भी होगी आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष की रैली में केवल कार ही नहीं, बल्कि रौनक सिंह खोखर के पास मौजूद ऐतिहासिक पाराट्रूप फोल्डिंग बाइक भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। रौनक सिंह भी इस रैली में भाग लेकर युवा पीढ़ी के बीच ऐतिहासिक वाहनों के प्रति जागरूकता पैदा करेंगे।
ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण
गुरमुख सिंह खोखर की यह 1933 की ऑस्टिन कार केवल एक वाहन नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का एक अनूठा नमूना है जिसे उन्होंने दशकों से सहेज कर रखा है। चाईबासा से कोलकाता तक का यह सफर न केवल एक प्रतियोगिता है, बल्कि पुरानी यादों और विरासत को जिंदा रखने का एक प्रयास भी है।



