प्रेमचंद की कहानियों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध 

Chaibasa :- कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर इप्टा, चाईबासा शाखा द्वारा आयोजित प्रेमचंद जयंती समारोह में किरदार नाट्य दल, चक्रधरपुर के प्रख्यात स्टोरी टेलर सह सिनेमा और टी.वी. सीरियल फेम दिनकर शर्मा और और उनकी रंगकर्मी छात्रा खुशी वर्मा ने क्रमशः कहानी ‘बड़े भाई साहब’ और ‘नमक का दारोगा’ की जीवंत प्रस्तुति कर उपस्थित दर्शकों के मर्म को स्पर्श किया.

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कार्यक्रम में सर्वप्रथम आमंत्रित कलाकारों और दर्शकों का स्वागत अध्यक्ष कैसर परवेज और सचिव संजय कुमार चौधरी के द्वारा किया गया. तत्पश्चात प्रेमचंद जी की तस्वीर के समीप दीप प्रज्वलित कर और कथा सम्राट को माल्यार्पण कर संस्था के सदस्यों एवं आगंतुक दर्शकों द्वारा श्रद्धा-सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई.

इसके बाद संचालिका शीतल सुगंधिनी बागे ने उपन्यास सम्राट के व्यक्तित्व और कृतित्व पर सारगर्भित चर्चा करते हुए कार्यक्रम की अगली कड़ी की शुरुवात की. अब खुशी वर्मा मंच पर थी और शुरु हुआ प्रेमचंद को उनकी कहानियों के द्वारा समझने का दौर. खुशी ने कहानी ‘नमक का दारोगा’ की शुरुवात ही इतनी मजबूती से किया की. दर्शकगण स्वतः ही प्रस्तुति के साथ जुड़ गए और अंत तक खुशी की संवाद अदायगी, भाव-भंगिमाओं के साथ भावनात्मक रूप से बहते चले गए. इसके बाद आमंत्रित कलाकार दिनकर शर्मा ने प्रेमचंद की कहानी ‘बड़े भाई साहब’ का मंचन शुरु किया. दो भाइयों की रिश्तों पर केंद्रित इस कहानी की प्रस्तुति में दिनकर जी का अनुभव स्पष्ट दिखाई दिया. दोनों भाइयों के चरित्र को दिनकर ने अपने सात्विक अभिनय से उपस्थित दर्शकों के समक्ष दृश्यात्मक कर दिया. दिनकर की प्रस्तुति को दर्शकों की भरपूर सराहना मिली. दोनों ही प्रस्तुतियाँ लाजवाब रहीं.

अंत में विशिष्ट प्रस्तुति के रूप में खुशी वर्मा ने दिनकर शर्मा की कविता ‘रेप’ की नाटकीय प्रस्तुति दी. बलात्कार जैसे ज्वलंत मुद्दे पर आधारित इस अद्भुत प्रस्तुति ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया और सब की आँखें नम हो गई. दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ ये बता रही थी कि प्रस्तुतियों का गहरा प्रभाव उन पर पड़ा है. देवेन्द्र कु. मिश्रा ने अपने वक्तव्य में प्रेमचंद के कथासाहित्य पर गहराई से दृष्टिपात करते हुए कहा कि आज भी प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता और उपयोगिता बनी हुई है और आगे भी बनी रहेगी. कार्यक्रम में परवेज़ आलम, कैसर परवेज और शीतल सुगंधिनी बागे ने सामूहिक जनगीत का गायन भी किया.

मौके पर ही शहर की शिक्षाविद डॉ.शशिलता ने जर्मनी से वीडियो कॉल के जरिए हिंदी सहित्य के प्रति प्रेम को प्रदर्शित करते हुए बड़े उत्सुकता के साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और रंगकर्मियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि जब तक हिंदी साहित्य रहेगा तब तक प्रेमचंद की रचनाओं को पढ़ा जाऐगा और साहित्य से लोगों का प्रेम बना रहेगा. उन्होंने इप्टा द्वारा आयोजित कार्यक्रम की प्रशंसा भी की. कार्यक्रम की सफलता में इप्टा, चाईबासा के सदस्य श्यामल दास, मौसम राम, शिवशंकर राम, अन्नू पूर्ती, रोबिन आदि का विशेष सहयोग रहा. कार्यक्रम में अनंत कुमार विश्वकर्मा, प्रताप कटियार, प्रशांत कुमार सहित काफी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे.

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