पब जी के नशे में खो रहा बच्चों का बचपन, जंगल बना ‘ऑनलाइन गेमिंग ज़ोन’

Chaibasa (चाईबासा) : झारखंड के किरीबुरु क्षेत्र में मोबाइल गेम पब जी (PUBG) का नशा बच्चों के बचपन और भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। स्कूल जाने और पढ़ाई करने की उम्र में अब कई बच्चे घंटों मोबाइल की स्क्रीन में खोए रहते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, एपेक्स ऑफिस के पीछे का जंगल अब बच्चों का नया “ऑनलाइन गेमिंग ज़ोन” बन गया है, जहां 10 से 16 वर्ष की उम्र के बच्चे छिपकर दिनभर पब जी खेलते हैं। कई बार CISF जवान उन्हें डांटकर भगाते हैं, लेकिन कुछ देर बाद वे फिर लौट आते हैं।

जमगल में अपने हाथों में मोबाइल फोन पर पब जी खेलते हुए

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🔸 खेल के चक्कर में खतरे से बेखबर बच्चे

जिस जंगल में ये बच्चे खेलते हैं, वहां सांप-बिच्छू और जंगली कीड़े-मकोड़ों का खतरा हमेशा बना रहता है। बावजूद इसके, बच्चे बिना किसी डर के घंटों मोबाइल में मशगूल रहते हैं। कुछ बच्चे तो स्कूल से लौटते ही सीधा जंगल की ओर निकल जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है, “पहले बच्चे मैदान में क्रिकेट या फुटबॉल खेलते थे, अब मोबाइल लेकर जंगल भाग जाते हैं। धीरे-धीरे उनका ध्यान पढ़ाई से पूरी तरह हटता जा रहा है।”


🔸 विशेषज्ञों की चेतावनी

मनोविज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि पब जी जैसे हिंसक ऑनलाइन गेम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं।

“ऐसे गेम बच्चों की एकाग्रता को नष्ट करते हैं, उनमें आक्रामकता बढ़ाते हैं और वे वास्तविक जीवन से कटने लगते हैं।”

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह एक प्रकार का ‘डिजिटल व्यसन’ (Digital Addiction) है, जो धीरे-धीरे बच्चों को समाज और परिवार से दूर कर रहा है।


🔸 जागरूकता की बढ़ी मांग

इस बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए कुछ स्कूलों ने अब डिजिटल व्यसन पर जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि जब तक बच्चों को मोबाइल उपयोग की सीमा और उसके दुष्प्रभाव के बारे में समझाया नहीं जाएगा, तब तक स्थिति नहीं सुधरेगी।


🔸 समाजसेवियों की अपील

समाजसेवियों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के मोबाइल उपयोग का समय तय करें और उन्हें खेलकूद, पढ़ाई व रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करें।

“अगर परिवार, स्कूल और समाज एकजुट होकर काम करें, तो इन मासूमों को इस डिजिटल नशे से बचाया जा सकता है।”


🔸 सामूहिक जिम्मेदारी की जरूरत

पब जी जैसे गेम सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब वे बच्चों के जीवन पर हावी हो रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि हर अभिभावक अपने बच्चे पर नजर रखे और उन्हें असली जीवन के खेलों की ओर वापस लाए।

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