कैरव गांधी अपहरण मामला: 13 दिनों बाद सकुशल बरामद, पुलिस की बड़ी कामयाबी

कैरव गांधी

Jamshedpur (जमशेदपुर) : Kairav ​​Gandhi kidnapping case (कैरव गांधी अपहरण मामला) आखिरकार 13 दिनों के लंबे इंतजार के बाद खत्म हुआ, जब जमशेदपुर पुलिस ने कारोबारी कैरव गांधी को सकुशल बरामद कर लिया। यह बरामदगी हजारीबाग–बिहार बॉर्डर के पास उस समय हुई, जब अपहरणकर्ता उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांजिट कर रहे थे।

इस सनसनीखेज कैरव गांधी अपहरण मामला ने न केवल जमशेदपुर बल्कि पूरे झारखंड और बिहार में सनसनी फैला दी थी।

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कैरव गांधी, Kairav ​​Gandhi,
                          Kairav ​​Gandhi

कैरव गांधी अपहरण मामला: कैसे हुई बरामदगी?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कैरव गांधी को अपहरण के बाद लगातार स्थान बदले जा रहे थे ताकि पुलिस को कोई सुराग न मिल सके। लेकिन तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचना के आधार पर जमशेदपुर पुलिस ने हजारीबाग के पास जाल बिछाया और अपहरणकर्ताओं को धर दबोचा।

इस कार्रवाई में यह साफ हुआ कि कैरव गांधी अपहरण मामला बिहार के एक संगठित किडनैपिंग गिरोह से जुड़ा हुआ है।

बिहार के बड़े किडनैपिंग गिरोह का खुलासा

जांच में सामने आया है कि इस कैरव गांधी अपहरण मामला (Kairav ​​Gandhi kidnapping case) के पीछे बिहार का एक बड़ा आपराधिक गिरोह सक्रिय था, जो पहले भी कई अपहरण की वारदातों को अंजाम दे चुका है। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

पुलिस अधिकारियों का बयान

जमशेदपुर के सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने बताया कि कैरव गांधी अपहरण मामला (Kairav ​​Gandhi kidnapping case) में पीड़ित को पूरी तरह सुरक्षित बरामद कर लिया गया है। फिलहाल जांच जारी है और सही समय पर आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी की जाएगी।

हालांकि, पुलिस ने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि फिरौती की मांग हुई थी या नहीं।

रहस्य अब भी बरकरार

जिस तरह रहस्यमयी परिस्थितियों में कैरव गांधी लापता हुए थे, उसी तरह उनकी वापसी भी कई सवाल खड़े करती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है:

  • 13 दिनों तक कैरव गांधी कहां रखे गए?

  • अपहरणकर्ताओं का असली मकसद क्या था?

  • क्या इसमें किसी करीबी की भूमिका थी?

कैरव गांधी अपहरण मामला में इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।

पहले भी मिले थे अहम सुराग

गौरतलब है कि इससे पहले पुलिस ने कैरव गांधी की कार चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा से बरामद की थी। इसके अलावा, डीजीपी तदाशा मिश्रा का जमशेदपुर दौरा भी इस कैरव गांधी अपहरण मामला को बेहद संवेदनशील बनाता है।

निष्कर्ष

कैरव गांधी अपहरण मामला जमशेदपुर पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती था, जिसे सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया है। हालांकि केस से जुड़े कई पहलू अब भी जांच के दायरे में हैं, लेकिन सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि कैरव गांधी पूरी तरह सुरक्षित हैं।

आने वाले दिनों में पुलिस के आधिकारिक बयान से इस पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद है।

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