1993 विस्फोट प्रकरण चम्पई सोरेन से जुड़े लगभग तीन दशक पुराने मामले में मंगलवार को अहम मोड़ आया। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सरायकेला विधानसभा क्षेत्र से विधायक चम्पई सोरेन चाईबासा स्थित MP-MLA विशेष अदालत में उपस्थित हुए, जहां अदालत ने उनके विरुद्ध औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए। इसके साथ ही इस बहुचर्चित मामले में न्यायिक सुनवाई यानी ट्रायल की शुरुआत हो गई।
यह मामला वर्ष 1993 में झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा आहूत बंद के दौरान कथित रूप से विस्फोटक पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़ा है।
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किन धाराओं में चलेगा ट्रायल?
MP-MLA कोर्ट ने 1993 विस्फोट प्रकरण चम्पई सोरेन में चम्पई सोरेन के साथ-साथ दो अन्य आरोपियों—
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श्याम नंदन टुडू उर्फ डॉक्टर टुडू
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अरुण महतो
के खिलाफ गंभीर धाराओं में आरोप गठित किए हैं।
लगाए गए कानून
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विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908
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धारा 4
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धारा 5
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धारा 6
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भारतीय दंड संहिता (IPC)
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धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र)
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धारा 201 (साक्ष्य नष्ट करना या छिपाना)
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इन धाराओं के तहत अब मामले की नियमित सुनवाई होगी।

चम्पई सोरेन ने आरोपों से किया इनकार
अदालत में सुनवाई के दौरान चम्पई सोरेन ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए स्वयं को निर्दोष बताया। उन्होंने अदालत में ट्रायल का सामना करने की सहमति दी और कहा कि न्याय प्रक्रिया में उन्हें पूरा भरोसा है।
1993 विस्फोट प्रकरण चम्पई सोरेन राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
समय के साथ घटते गए आरोपी
मामले से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेश साव ने बताया कि यह केस गम्हरिया थाना कांड संख्या 62/1993 के तहत दर्ज किया गया था। शुरुआती दौर में इस केस में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन लंबा समय बीतने के कारण अधिकांश आरोपियों का निधन हो चुका है।
मृत आरोपियों के नाम
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देव चरण गोस्वामी
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डॉन
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सोमय मोदी
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जोगेश्वर टुडू
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सनातन गोराई
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देवपाल गोराई
वर्तमान में 1993 विस्फोट प्रकरण चम्पई सोरेन में केवल तीन आरोपी ही जीवित हैं और न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
जमानत को लेकर राहत
अदालत ने आरोपी श्याम नंदन टुडू की पूर्व में दी गई जमानत को बरकरार रखने का आदेश दिया। पहले तकनीकी कारणों से जमानत को लेकर असमंजस की स्थिति बनी थी, जिसे अब सेशन कोर्ट में मामला स्थानांतरित होने के बाद स्पष्ट कर दिया गया है।
क्या था 1993 का पूरा मामला?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 18 सितंबर 1993 को झारखंड बंद के दौरान आंदोलन को उग्र रूप देने के लिए कथित तौर पर विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। इसी घटना के आधार पर गम्हरिया थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
यह मामला अब 1993 विस्फोट प्रकरण चम्पई सोरेन के नाम से जाना जाता है।
अब गवाही का दौर शुरू
आरोप तय होने के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तिथि पर अपने गवाहों को प्रस्तुत किया जाए, ताकि साक्ष्य की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
निष्कर्ष
1993 विस्फोट प्रकरण चम्पई सोरेन एक ऐसा मामला है, जो न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगभग 30 साल बाद आरोप तय होना न्यायिक प्रक्रिया में एक बड़ा कदम है।
अब सभी की निगाहें ट्रायल और गवाहों की गवाही पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस ऐतिहासिक मामले का अंतिम परिणाम क्या होगा।
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