Kolhan Bandh News: भारत बंद ऐतिहासिक, मजदूर–किसान मुद्दों पर यूनियन की 7 सूत्री मांग

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चाईबासा/कोल्हान, 12 फरवरी 2026: Kolhan Bandh News के तहत आयोजित भारत बंद को कोल्हान क्षेत्र के मजदूर संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने ऐतिहासिक बताते हुए इसे जनआक्रोश की मजबूत अभिव्यक्ति करार दिया है। बंद के दौरान महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, निजीकरण और श्रमिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। यूनियन नेताओं का कहना है कि वर्तमान आर्थिक और सामाजिक नीतियों का सबसे अधिक दबाव मजदूर और किसान वर्ग पर पड़ रहा है, जिसके कारण देशव्यापी आंदोलन की आवश्यकता महसूस हुई।

बंद का असर चाईबासा समेत कोल्हान के विभिन्न औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में देखा गया। कई स्थानों पर जुलूस, धरना और प्रदर्शन आयोजित किए गए, हालांकि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

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श्रम कानून और निजीकरण के खिलाफ नाराजगी

Kolhan Bandh News में यूनियन प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम कानूनों पर गहरी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इन कानूनों से श्रमिकों के पारंपरिक अधिकार कमजोर होंगे और स्थायी रोजगार की व्यवस्था प्रभावित होगी।

नेताओं ने आरोप लगाया कि:

  • आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा

  • स्थायी नियुक्तियों में कमी आएगी

  • श्रमिक सुरक्षा प्रावधान कमजोर होंगे

उनका यह भी कहना था कि बड़े औद्योगिक घरानों को नीतिगत लाभ दिए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं।

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स्थानीय रोजगार और विकास बना बड़ा मुद्दा

यूनियन नेताओं ने कहा कि कोल्हान जैसे खनिज संपदा से समृद्ध क्षेत्र में भी स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा। उद्योगों में बाहरी श्रमिकों की संख्या अधिक है, जबकि विस्थापित और जमीन दाता परिवारों को नौकरी की गारंटी तक नहीं मिलती।

Kolhan Bandh News के दौरान वक्ताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और बुनियादी ढांचे की बदहाल स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि संसाधन समृद्ध क्षेत्र होने के बावजूद कोल्हान विकास की दौड़ में पीछे है।

कोल्हान विकास को लेकर यूनियन की 7 सूत्री मांग

भारत बंद के समर्थन में यूनियन द्वारा महामहिम के नाम सौंपे जाने वाले ज्ञापन में सात प्रमुख मांगें रखी गईं, जो इस प्रकार हैं—

1️⃣ श्रम कानून वापस लेने की मांग

चारों नए श्रम कानूनों को वापस लिया जाए तथा स्थायी कार्यों में स्थायी नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।

2️⃣ पेसा कानून लागू करने की मांग

अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून 1996 सख्ती से लागू हो तथा ग्रामसभा की अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण पर रोक लगे।

3️⃣ 75% स्थानीय रोजगार

कोल्हान में संचालित कंपनियों—टाटा ग्रुप, रुंगटा ग्रुप और एसीसी लिमिटेड—में 75% स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाए तथा जमीन दाताओं को नौकरी की गारंटी मिले।

4️⃣ न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि

महंगाई को देखते हुए न्यूनतम मजदूरी 600 से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिदिन तय की जाए।

5️⃣ NH-75 सुरक्षा व्यवस्था

NH-75 पर नो-एंट्री नियम सख्ती से लागू कर सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जाए।

6️⃣ अवैध खनन और मानव-हाथी संघर्ष

अवैध खनन पर रोक लगाई जाए तथा मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित कर पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।

7️⃣ DMFT फंड पारदर्शिता

DMFT फंड का उपयोग ग्रामसभा की सहमति से पारदर्शी तरीके से हो तथा सिंचाई और जल संरक्षण योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए।

महंगाई और पलायन पर भी उठा सवाल

Kolhan Bandh News के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने मजदूर और किसान परिवारों की कमर तोड़ दी है। रोजगार के अभाव में युवाओं का बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है, जिससे सामाजिक ढांचा भी प्रभावित हो रहा है।

उनका कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और मजदूरी दर में सुधार नहीं हुआ, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

यूनियन नेताओं ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो कोल्हान क्षेत्र में आंदोलन और तेज किया जाएगा। भविष्य में चरणबद्ध आंदोलन, औद्योगिक बंद और बड़े जनप्रदर्शन की रणनीति भी बनाई जा सकती है।

हालांकि भारत बंद के दौरान सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे, लेकिन संगठनों ने इसे संघर्ष की शुरुआत बताया है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर Kolhan Bandh News यह दर्शाता है कि क्षेत्र में मजदूर, किसान और स्थानीय युवाओं के मुद्दे गंभीर होते जा रहे हैं। श्रम कानून, निजीकरण, स्थानीय रोजगार, महंगाई और विस्थापन जैसे प्रश्नों पर व्यापक असंतोष मौजूद है।

अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन यूनियन की 7 सूत्री मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं—क्योंकि कोल्हान में आने वाले समय में आंदोलन और तेज होने के संकेत स्पष्ट मिल रहे हैं।

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