चाईबासा: चाईबासा में आस्था, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक चैती छठ पूजा पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में श्रद्धालु कठोर नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य और छठी मइया की आराधना कर रहे हैं। छठ पर्व को शुद्धता, अनुशासन और कठिन तपस्या का प्रतीक माना जाता है।

खरना का विशेष महत्व
पर्व के दूसरे दिन ‘खरना’ का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रती सुबह से निर्जला उपवास रखते हैं और संध्या समय विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। घरों और घाटों पर साफ-सफाई कर विशेष तैयारी की जाती है। इसके बाद व्रती भगवान सूर्य की पूजा कर गुड़ की खीर, रोटी और फल से खरना प्रसाद तैयार करते हैं।

प्रसाद वितरण और भक्तिमय माहौल
पूजा के उपरांत व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसे परिवारजनों, रिश्तेदारों तथा आसपास के लोगों में वितरित करते हैं। खरना प्रसाद को अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे पाने के लिए लोग श्रद्धा से प्रतीक्षा करते हैं। शाम होते ही शहर के विभिन्न इलाकों में छठ गीतों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
प्रशासन की व्यवस्था
छठ पूजा के अवसर पर घाटों और घरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा साफ-सफाई, रोशनी और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अर्घ्य की तैयारी
अब श्रद्धालु तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में जुट गए हैं। अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस महापर्व का समापन होगा। छठ पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता, भाईचारा और सामूहिक सहभागिता का संदेश भी देती है।








