Saraikela (सरायकेला) : स्वर्णरेखा नदी से कथित अवैध बालू उत्खनन को लेकर ईचागढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों का गुस्सा अब उबाल पर है। ईचागढ़ और आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने नदी घाटों पर कथित अवैध बालू उठाव के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए सीधे विवेक झा उर्फ छोटू झा का नाम लिया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि छोटू झा के प्रभाव में बालू के कारोबार का सिंडिकेट संचालित किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम और एनजीटी के प्रतिबंधों के बावजूद क्षेत्र के नदी घाटों से शाम होते ही कथित रूप से बालू उठाव शुरू हो जाता है और सुबह तक हाईवा की आवाजाही जारी रहती है। ग्रामीणों का दावा है कि रोजाना बड़ी संख्या में हाईवा नदी से बालू लेकर निकलते हैं। उनका सवाल है कि यदि यह गतिविधि वास्तव में इतने बड़े पैमाने पर चल रही है, तो पुलिस और प्रशासन की निगरानी आखिर कहां है?
छोटू झा का नाम लेकर ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नदी घाटों से बालू उठाव के पीछे छोटू झा का प्रभाव है। ग्रामीणों का कहना है कि विरोध करने पर बालू कारोबार से जुड़े लोगों द्वारा उन्हें धमकाया जाता है। उनका आरोप है कि कुछ लोग कथित रूप से दबाव बनाने और ग्रामीणों की आवाज दबाने का प्रयास करते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि नदी घाटों से बालू उठाने, उसे स्टॉक यार्ड तक पहुंचाने और आगे आपूर्ति करने में कौन-कौन लोग शामिल हैं। ग्रामीणों ने कहा कि जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
रात के अंधेरे में बालू का खेल या प्रशासन की आंखों पर पट्टी?
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर है। उनका कहना है कि यदि रात के समय सैकड़ों हाईवा कथित रूप से नदी घाटों से निकल रहे हैं, तो फिर पुलिस और खनन विभाग की कार्रवाई क्यों नजर नहीं आती?
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूछा कि नदी घाट से लेकर स्टॉक यार्ड और वहां से शहर तक बालू पहुंचने की पूरी कड़ी की जांच आखिर कब होगी? ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ छोटे वाहनों पर कार्रवाई करने से काम नहीं चलेगा। कथित बड़े नेटवर्क और उसके संचालकों की भूमिका भी सामने लानी होगी।
ओवरलोड हाईवा ने तोड़ी सड़क, ग्रामीणों का जीना हुआ मुश्किल
ग्रामीणों का आरोप है कि बालू लदे ओवरलोड हाईवा की लगातार आवाजाही से गांव की सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं। भारी वाहनों के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है और दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी और पर्यावरण को नुकसान के साथ-साथ इस कथित बालू कारोबार का सीधा खामियाजा गांव की जनता भुगत रही है। सड़क टूट रही है, धूल उड़ रही है और ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में है।
अब बनेगा ‘पर्यावरण रक्षा दल’, घाटों पर ग्रामीणों की निगरानी
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अब वे प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार नहीं करेंगे। गांव स्तर पर ‘पर्यावरण रक्षा दल’ बनाने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह दल नदी, घाट, पुल और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सामूहिक रूप से आवाज उठाएगा।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि कथित अवैध बालू उठाव पर तत्काल रोक नहीं लगी तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ भी सड़क पर उतरेंगे।
मीडिया में खबरों के बाद भी क्यों नहीं रुका कथित कारोबार?
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कथित अवैध बालू उत्खनन को लेकर पहले भी मीडिया में खबरें प्रकाशित हुई हैं। इसके बावजूद यदि नदी घाटों पर गतिविधियां जारी हैं, तो यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मामले को लेकर कुछ पत्रकारों पर कानूनी नोटिस के माध्यम से दबाव बनाने का प्रयास किया गया। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने कहा कि पत्रकारों और ग्रामीणों की आवाज दबाने के बजाय प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
ग्रामीणों का सीधा सवाल—छोटू झा पर कब होगी जांच?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से सीधा सवाल किया है कि यदि छोटू झा के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप गलत हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने क्यों नहीं लाई जाती? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई में देरी क्यों?
ग्रामीणों ने मांग की है कि नदी घाटों की तत्काल जांच हो, रात में निगरानी बढ़ाई जाए, हाईवा के परिचालन और स्टॉक यार्ड तक पहुंचने वाले बालू की जांच की जाए तथा पूरे कथित नेटवर्क की वित्तीय और प्रशासनिक कड़ियों की पड़ताल हो।
ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि अब नदी किसी के निजी कारोबार का जरिया नहीं बनेगी। प्रशासन कार्रवाई करे, वरना गांव के लोग खुद पर्यावरण और नदी की रक्षा के लिए मोर्चा संभालेंगे।








