18 इनामी नक्सलियों तक सिमटा झारखंड में ‘लाल आतंक’, एक करोड़ के असीम मंडल पर पुलिस की नजर

Ranchi (रांची) :  झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे लगातार अभियानों का असर अब नक्सली संगठनों के नेटवर्क पर साफ दिखाई देने लगा है। कभी राज्य में 200 से अधिक वांटेड और इनामी नक्सलियों की लंबी सूची हुआ करती थी, लेकिन पुलिस की कार्रवाई, गिरफ्तारियों, मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण के बाद यह संख्या अब घटकर करीब 18 वांटेड इनामी नक्सलियों तक सिमटने की बात सामने आई है। इन 18 नामों में सबसे बड़ी संख्या CPI (Maoist) से जुड़े कैडरों की है।

 

चाईबासा में नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता, 10 लाख के इनामी सालुका कायम समेत चार ने किया आत्मसमर्पण

नक्सल विरोधी अभियान में हाल के महीनों में झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को कई बड़ी सफलताएं मिली हैं। जुलाई 2026 में कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को पुलिस ने अभियान की बड़ी उपलब्धियों में गिना है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बेसरा पर दो करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था और उसके खिलाफ बड़ी संख्या में मामले दर्ज थे।

 

सबसे बड़ी चुनौती अब एक करोड़ का इनामी असीम मंडल

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद झारखंड पुलिस की नजर अब एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर पर टिकी है। असीम मंडल CPI (Maoist) में केंद्रीय स्तर की जिम्मेदारी से जुड़ा बताया जाता है और उसका संबंध पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर क्षेत्र से बताया गया है।

पुलिस के अनुसार, असीम मंडल झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा से जुड़े इलाकों में सक्रिय है। उसके साथ करीब सात अन्य बंगाली सदस्य भी मौजूद बताए जा रहे हैं। सीमा क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और जंगल-पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर यह समूह सुरक्षा एजेंसियों से बचने की कोशिश करता रहा है।

असीम मंडल की तलाश में झारखंड पुलिस के साथ पश्चिम बंगाल पुलिस के स्तर पर भी समन्वय किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में उसकी गतिविधियों और संभावित मूवमेंट पर नजर रखते हुए संयुक्त अभियान की रणनीति तैयार की जा रही है।

 

असीम के बाद ब्रजेश गंझु पर 25 लाख का इनाम

इनामी नक्सलियों की सूची में असीम मंडल के बाद TPC सुप्रीमो ब्रजेश सिंह गंझु उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ सरकार का नाम प्रमुख है। उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित बताया गया है।

इसके अलावा CPI (Maoist) के राम प्रसाद मांझी उर्फ सचिन मांझी और नितेश यादव उर्फ इरफान उर्फ नंदू उर्फ किरानी पर 15-15 लाख रुपये का इनाम है। दोनों को संगठन में क्षेत्रीय स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ा बताया गया है।

 

10 लाख से लेकर 1 लाख रुपये तक के इनामी

पुलिस की सूची में कई ऐसे नक्सली भी हैं, जिन पर 10 लाख रुपये तक के इनाम घोषित हैं। इनमें CPI (Maoist) से जुड़े आरिफ उर्फ शशिकांत उर्फ सुधेर जी उर्फ सुरेश जी, मनोहर गंझु, गोदराय यादव उर्फ संजय यादव, पुष्पा महतो उर्फ शकुंतला उर्फ परी और मीता उर्फ नयनतारा उर्फ परी के नाम शामिल बताए गए हैं।

वहीं समीर महतो उर्फ मंगल, पंकज कोरवा उर्फ पटेल और राजू भुईयां उर्फ छोटेलाल भुईयां पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम बताया गया है। JJMP से जुड़े रामदेव लोहरा उर्फ साधु उर्फ काका पर भी पांच लाख रुपये का इनाम है।

PLFI से जुड़े धनराम लोहरा उर्फ जडू उर्फ मनजु पर दो लाख रुपये और सामुअल बाड़ा उर्फ सामु पर एक लाख रुपये का इनाम बताया गया है। सूची में CPI (Maoist) के कुछ अन्य कैडरों पर भी एक से दो लाख रुपये तक के इनाम दर्ज हैं।

 

ऑपरेशन का असर: लगातार कमजोर हो रहा नक्सली नेटवर्क

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के लंबे दौर में सुरक्षा बलों ने जंगल और पहाड़ी इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। इसके साथ ही सड़क, मोबाइल नेटवर्क और पुलिस कैंपों के विस्तार ने भी नक्सली गतिविधियों के पारंपरिक सुरक्षित क्षेत्रों को प्रभावित किया है।

गिरफ्तारी, मुठभेड़ और आत्मसमर्पण के कारण संगठन के जमीनी नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। मई 2026 में भी झारखंड में एक साथ 27 नक्सलियों के आत्मसमर्पण की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद जुलाई में भी कई नक्सलियों ने हथियार डाले।

इसी क्रम में मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सफलता माना गया।

 

2026 में नक्सल विरोधी अभियान ने पकड़ी रफ्तार

झारखंड पुलिस के लिए वर्ष 2026 नक्सल विरोधी अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा है। लगातार कार्रवाई के कारण कई इनामी कैडर या तो गिरफ्तार हुए, मारे गए अथवा मुख्यधारा में लौटने के लिए आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

पुलिस की रणनीति अब केवल जंगलों में सर्च ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर लक्षित कार्रवाई, सीमावर्ती राज्यों के साथ समन्वय और नक्सली संगठनों के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

 

मिसिर बेसरा के बाद असीम मंडल अगला बड़ा टारगेट

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने अब असीम मंडल को पकड़ना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। झारखंड पुलिस के आईजी अभियान नरेंद्र सिंह के मुताबिक, बेसरा की गिरफ्तारी अभियान की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन नक्सल विरोधी अभियान को रोकने का सवाल नहीं है।

असीम मंडल को लेकर सीमा क्षेत्र में अभियान जारी रखने और पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ समन्वय मजबूत करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। पुलिस की कोशिश है कि असीम मंडल और उसके दस्ते की गतिविधियों पर नजर रखते हुए उसे सुरक्षित ठिकाने से बाहर निकालकर गिरफ्तार किया जाए।

 

18 नाम बचे, लेकिन अभियान अभी खत्म नहीं

इनामी और वांटेड नक्सलियों की संख्या में आई कमी निश्चित रूप से सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन पुलिस के सामने चुनौती अभी समाप्त नहीं हुई है। खासकर असीम मंडल जैसे शीर्ष स्तर के नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि सीमावर्ती जंगल क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों के पूरी तरह समाप्त होने तक अभियान जारी रखना होगा।

झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। 200 से अधिक वांटेड नक्सलियों से घटकर करीब 18 तक पहुंची सूची सुरक्षा बलों की वर्षों की कार्रवाई का परिणाम मानी जा रही है। अब पुलिस की निगाह उन बचे हुए शीर्ष कमांडरों पर है, जिनमें सबसे बड़ा नाम एक करोड़ रुपये के इनामी असीम मंडल का है।

 

http://Jharkhand Naxal News: झारखंड में नक्सलियों को बड़ा झटका, 22 लाख के तीन इनामी माओवादी गिरफ्तार, AK-47 समेत भारी हथियार बरामद

 

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *