SIR को लेकर झामुमो का प्रदर्शन, चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

चाईबासा में SIR के मुद्दे पर झामुमो के प्रदर्शन की तस्वीर

चाईबासा, 28 सितंबर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर झामुमो ने रविवार को चाईबासा में प्रदर्शन और पुतला दहन किया। पार्टी नेताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।

झामुमो के जिला अध्यक्ष सोनाराम देवगम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आयोग का दायित्व केवल चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि पात्र नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करना भी है।

देवगम ने कहा कि SIR की प्रक्रिया के दौरान यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से हटता है या उसे अपना नाम और नागरिक अधिकार साबित करने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो इस पर स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए।

चाईबासा में SIR के मुद्दे पर झामुमो के प्रदर्शन की तस्वीर

SIR पर उठे सवालों का सार्वजनिक जवाब मांगा

झामुमो जिला अध्यक्ष ने The Indian Express की 23 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 महीनों में निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने SIR से संबंधित फैसलों और निर्देशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।

वहीं, निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा है कि SIR से जुड़े निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे और दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाए गए मुद्दे अंतिम निर्णय से असहमति के बराबर नहीं थे।

झामुमो ने कहा कि इस तरह के परस्पर विरोधी दावों के बीच आयोग को पूरी प्रक्रिया और निर्णयों से संबंधित तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए।

बूथवार प्रक्रिया और नाम हटाने के आधार बताने की मांग

देवगम ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों को केवल राजनीतिक आरोप बताकर खारिज करने के बजाय चुनाव आयोग को SIR के तहत नामों के सत्यापन, नाम हटाने के आधार, आपत्तियों के निस्तारण और पात्र मतदाताओं की सुरक्षा से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सत्यापन योग्य होनी चाहिए। उनके मुताबिक, “वोट किसी सरकार, पार्टी या आयोग की संपत्ति नहीं है। यह भारत के नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।”

CEC के इस्तीफे की मांग का भी जिक्र

झामुमो नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है तथा आयोग से जुड़े किसी भी विवाद पर तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।

देवगम ने कथित तौर पर बिना टेंडर किसी कार्य या जिम्मेदारी दिए जाने से जुड़े मामले में भी स्पष्टता और निष्पक्ष जांच की मांग की। यह आरोप/मांग झामुमो की ओर से रखी गई है; उपलब्ध सामग्री में संबंधित मामले पर आयोग या ज्ञानेश कुमार का पक्ष दर्ज नहीं है।

झामुमो ने कहा कि वह लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को संवैधानिक मंचों पर उठाता रहेगा।

कार्यक्रम में जिला सचिव राहुल आदित्य, इकबाल अहमद, रामलाल मुंडा, अशोक दास, अकबर खान, चंद्रमोहन बोदरा, विश्वनाथ बारा, दीपक प्रधान, बाबू भट्टाचार्य, गणेश बोदरा, अघना कंडुलना, सतीश सुंडी, नवाज हुसैन, विजय बारी, जवाहर बोयपाई समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे।

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