चाईबासा। कभी दैनिक मजदूरी पर निर्भर रहने वाली पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर चाईबासा प्रखंड के हरिला गांव की श्रीमती कविता तांती ने बकरी पालन को अपनी आजीविका का जरिया बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना से मिले सहयोग के बाद उनके परिवार की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
मजदूरी पर टिकी थी परिवार की आजीविका
योजना से जुड़ने से पहले कविता तांती के परिवार की आय मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थी। काम नियमित नहीं मिलने के कारण परिवार को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। उस समय उनकी सालाना आय करीब 30 हजार रुपये थी। सीमित आमदनी में बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों का खर्च चलाना मुश्किल होता था।
स्वरोजगार शुरू करने के लिए पूंजी और पशुपालन की तकनीकी जानकारी का अभाव भी उनके सामने बड़ी बाधा थी।

10 बकरियों से शुरू हुआ सफर
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत कविता तांती को 8 मादा और 2 नर बकरियां, यानी कुल 10 बकरियां उपलब्ध कराई गईं। इसके बाद पशुपालन विभाग की ओर से उन्हें पशुओं की देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी गई।
बकरियों को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और पीपीआर तथा ईटी जैसी बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण कराया गया। इसके अलावा आधुनिक बकरी पालन की जानकारी देने के उद्देश्य से कविता को क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, कांके, रांची में पांच दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया गया।

बकरियों की संख्या बढ़ी तो आमदनी भी बढ़ी
पशुपालन शुरू करने के बाद कविता तांती की बकरी पालन इकाई धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी। दो मादा बकरियों ने चार बच्चों को जन्म दिया, जिसके बाद उनका झुंड 12 से अधिक बकरियों का हो गया। वर्तमान में तीन बकरियों के गर्भवती होने की जानकारी दी गई है।
बकरी पालन से उनकी आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आया है। जहां पहले परिवार की वार्षिक आय करीब 30 हजार रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 80 हजार से 1.30 लाख रुपये के बीच पहुंच गई है।

अब दूसरी महिलाओं को भी कर रही हैं प्रेरित
आर्थिक स्थिति बेहतर होने के बाद कविता तांती अब अपने गांव और आसपास की महिलाओं को भी बकरी पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। उनके अनुसार, पशुपालन से परिवार को अतिरिक्त आमदनी का साधन मिला है और आर्थिक फैसलों में उनकी भूमिका भी मजबूत हुई है।
पशुपालन विभाग की ओर से मिलने वाला मार्गदर्शन भी उनकी इकाई को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है।
उपायुक्त ने ग्रामीणों से योजनाओं का लाभ लेने की अपील की
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना जैसी पहल ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने में सहायक है। कविता तांती की कहानी बताती है कि उपलब्ध सरकारी सहायता का सही तरीके से उपयोग कर ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका को मजबूत कर सकते हैं।
उन्होंने ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं से पात्रता के अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
लाभार्थी बोलीं—अब बकरियां ही बनीं आय का सहारा
कविता तांती ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले परिवार की आमदनी के लिए उन्हें मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ता था। योजना के माध्यम से बकरी पालन शुरू करने के बाद अब उनके पास आय का अपना साधन है। उन्होंने मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना को अपने जीवन में बदलाव लाने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया।








