चाईबासा : रोलाडीह में बालू ट्रैक्टरों को लेकर भड़का विवाद, ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ भी जताई नाराजगी

तांतनगर में गांव की सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही से परेशान लोग सड़क पर उतरे, बैरियर तोड़ने का आरोप; ओपी प्रभारी ने कार्रवाई का भरोसा दिया

Chaibasa (चाईबासा) : पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर क्षेत्र के रोलाडीह गांव में मंगलवार को बालू ढुलाई को लेकर ग्रामीणों और कारोबार से जुड़े लोगों के बीच विवाद गहरा गया। गांव के रास्ते से लगातार गुजर रहे बालू लदे ट्रैक्टरों को लेकर स्थानीय लोगों में पहले से नाराजगी थी। इसी बीच रास्ता रोकने के लिए लगाए गए बैरियर को तोड़े जाने का आरोप सामने आया, जिसके बाद मामला तनावपूर्ण हो गया।

बालू ट्रैक्टर विवाद
बालू ट्रैक्टर विवाद

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विवाद की सूचना पर पहुंची पुलिस को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। नाराज ग्रामीणों ने पुलिस को गांव से वापस जाने के लिए कहा।

 

बालू टैक्टर विवाद

रास्ता रोकने के लिए लगाया था बैरियर

ग्रामीणों के अनुसार, गांव की सड़क पर बालू लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही लगातार बढ़ रही थी। इससे परेशान होकर उन्होंने बाहरी वाहनों को रोकने के उद्देश्य से रास्ते पर बैरियर लगाया था। आरोप है कि एक ट्रैक्टर ने बैरियर तोड़ दिया। इसका विरोध करने पर ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की कोशिश किए जाने की बात भी कही गई है।

घटना के बाद गांव के लोग एकजुट हो गए। देखते ही देखते बालू परिवहन के मुद्दे पर तनाव बढ़ गया। ग्रामीणों का कहना है कि वे गांव के भीतर से ट्रैक्टरों का परिचालन बंद कराना चाहते हैं, ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।

ग्रामीण मुंडा ने उठाए कार्रवाई पर सवाल

ग्रामीण मुंडा वीरेंद्र कालुंडिया ने आरोप लगाया कि ट्रैक्टरों की आवाजाही रोकने के लिए पहले भी कई बार संबंधित लोगों से आग्रह किया गया था। इस मामले में थाने को भी शिकायत दी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

ग्रामीणों का दावा है कि प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रैक्टर गांव की सड़क से गुजरते हैं। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सड़क पर चलने में परेशानी होती है। कुछ चालकों द्वारा विरोध करने वालों को धमकाने का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया है।

 

मुख्य सड़क के बजाय गांव का रास्ता क्यों?

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि बालू लदे वाहनों को गांव के भीतर से ले जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्य सड़क पर परेशानी होने के कारण चालक गांव के रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने प्रशासन से वाहनों के कागजात, बालू के स्रोत और परिवहन की अनुमति की जांच करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि एनजीटी की रोक के दौरान भी क्षेत्र में बालू की ढुलाई जारी थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभागों की जांच के बाद ही परिवहन की वैधता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ओपी प्रभारी ने दिया भरोसा

मौके पर पहुंचे ओपी प्रभारी अरविंद कुमार कुशवाहा ने ग्रामीणों से कहा कि रोलाडीह गांव के रास्ते से ट्रैक्टरों का परिचालन नहीं होना चाहिए। उन्होंने निर्देश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही।

ग्रामीणों की मांग है कि गांव की बस्ती को बालू ढुलाई के रास्ते के रूप में इस्तेमाल न किया जाए और नियमों के विरुद्ध चल रहे वाहनों पर कार्रवाई हो। अब प्रशासन के सामने ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, शिकायतों की जांच करने और विवाद का स्थायी समाधान निकालने की चुनौती है।

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