Adityapur: आदित्यपुर फेज-3 बरगीडीह में जमीन विवाद को लेकर ग्रामीणों में तनाव: कंटीले तार की घेराबंदी ग्रामीणों ने तोड़ी, जियाडा की जांच शुरू

आदित्यपुर जमीन विवाद

आदित्यपुर। आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र फेज-3 स्थित बरगीडीह में एक भूखंड पर कब्जे और दावेदारी को लेकर ग्रामीणों और विस्थापित पक्ष के बीच विवाद गहरा गया है। शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन किया और विवादित जमीन पर सीमेंट के पोल एवं कंटीले तार से की गई घेराबंदी को उखाड़कर तोड़ दिया। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जियाडा के क्षेत्रीय उपनिदेशक के निर्देश पर जांच अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और जमीन से जुड़े दस्तावेजों एवं पूरे मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।

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विस्थापित पक्ष ने बताया वैध आवंटित जमीन

विस्थापित परिवार की ओर से पक्ष रखते हुए उमा प्रसाद वर्मा ने बताया कि उनका परिवार जियाडा का विस्थापित है। उनके अनुसार वर्ष 1990 में जियाडा द्वारा विधिवत डिमार्केशन, नक्शा और परवाना जारी कर आवास निर्माण के लिए उक्त जमीन परिवार को दी गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन पर बाउंड्री और घेराबंदी का काम शुरू करने के दौरान कुछ लोग मौके पर पहुंचे और धक्का-मुक्की करते हुए सीमेंट के पोल एवं कंटीले तार की घेराबंदी को तोड़ दिया। उमा प्रसाद वर्मा ने कहा कि वे मामले को लेकर उपायुक्त, एसडीओ और स्थानीय प्रशासन से शिकायत कर सुरक्षा तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग करेंगे।

आदित्यपुर जमीन विवाद

ग्रामीणों ने खेल मैदान बताया, स्टेडियम बनाने की मांग

दूसरी ओर, ग्रामीणों की ओर से झायुमो के जिला उपाध्यक्ष सोमदेव प्रधान उर्फ विक्की प्रधान ने कहा कि संबंधित जमीन बरगीडीह का पारंपरिक खेल मैदान है। उन्होंने आरोप लगाया कि खेल मैदान की जमीन को छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर अवैध तरीके से बेचने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने जिला प्रशासन और मंत्री दीपक बिरुआ से मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि जमीन को ग्रामीणों के उपयोग में रखते हुए यहां स्टेडियम का निर्माण कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मामले का जल्द समाधान नहीं हुआ तो जियाडा कार्यालय का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा।

फिलहाल जियाडा की जांच टीम द्वारा जमीन के दस्तावेजों और दोनों पक्षों के दावों की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही जमीन के वास्तविक स्वामित्व और उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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