Adityapur (आदित्यपुर) : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी (LPG) गैस की किल्लत ने अब स्थानीय स्तर पर भी दस्तक दे दी है। भारत में गैस आपूर्ति कम होने का सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों पर भी पड़ता दिख रहा है। एक ओर जहाँ घरेलू गैस के लिए लोग गोदामों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं, वहीं एशिया के सबसे बड़े लघु औद्योगिक क्षेत्र, आदित्यपुर में भी स्थिति चिंताजनक होने लगी है।

उद्योगों पर ‘आंशिक’ असर, सरकार से उम्मीद
इंडस्ट्रियल स्टेबिलिटी एंड रिफॉर्म आर्गेनाइजेशन (ISRO) के अध्यक्ष रुपेश कतरियार ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह भयावह नहीं है, लेकिन फेब्रिकेशन और हीटिंग से जुड़े उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन उद्योगों में हीटिंग और फेब्रिकेशन के लिए एलपीजी का उपयोग ऑक्सीजन के साथ मिलाकर किया जाता है, वहां उत्पादन की गति कुछ धीमी हुई है। हालांकि, उन्हें विश्वास है कि भारत सरकार के प्रयासों से जल्द ही आपूर्ति सामान्य कर ली जाएगी।
छोटे व्यवसायों की थम सकती है रफ्तार
उद्योगों के उलट, छोटे और मध्यम वर्ग के व्यवसायी जैसे होटल, कैंटीन और ढाबा संचालक इस संकट से अधिक परेशान हैं। ज़ियाड़ा कैंपस में कैंटीन चलाने वाले सुनील मंडल ने बताया कि कमर्शियल गैस की आपूर्ति फिलहाल लगभग ठप है। पहले जहाँ आसानी से सिलेंडर मिल जाते थे, अब सिस्टम के तहत भी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। यदि अगले दो-तीन दिनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो कई कैंटीन और होटल बंद होने की कगार पर पहुँच जाएंगे, जिसका सीधा असर ग्राहकों और व्यवसाय पर पड़ेगा।







