चाईबासा, 5 नवंबर 2026। ऑनलाइन होटल बुकिंग के नाम पर पैसे लेने के बावजूद ग्राहकों को कमरा उपलब्ध नहीं कराना होटल प्रबंधन को महंगा पड़ गया। पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में फैब होटल के दोनों विपक्षी पक्षों को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए शिकायतकर्ता मोहम्मद बारिक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने होटल प्रबंधन को कुल **30,670 रुपये** भुगतान करने का आदेश दिया है।
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मामले के अनुसार, चाईबासा के 56बी, हिंद चौक, बड़ी बाजार निवासी मोहम्मद बारिक के पुत्र रजीक अनवर ने अपने माता-पिता के ठहरने के लिए कोलकाता के राजडांगा स्थित फैब होटल गेस्ट ओ पैलेस में 10 से 12 मई 2026 तक के लिए ऑनलाइन कमरा बुक कराया था। इसके लिए 5,670 रुपये का ऑनलाइन भुगतान भी किया गया था।
बताया गया कि 10 मई की रात करीब 9 से 10 बजे मोहम्मद बारिक अपनी पत्नी मनीला पिंगुआ के साथ होटल पहुंचे। लेकिन होटल प्रबंधन ने उनके नाम से बुकिंग होने से इनकार कर दिया और कमरा देने से मना कर दिया। इसके बाद बुजुर्ग दंपति को देर रात कोलकाता में दूसरे होटल की तलाश करनी पड़ी। इस दौरान उन्हें काफी परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
इसके बाद मोहम्मद बारिक ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए बुकिंग की 5,670 रुपये की राशि वापस करने के साथ मानसिक प्रताड़ना, असुविधा और आर्थिक नुकसान के लिए 60 हजार रुपये मुआवजे की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन भुगतान की रसीद, बैंक स्टेटमेंट और यात्रा टिकट समेत जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत किए। उनकी पत्नी ने भी गवाही देकर घटना की पुष्टि की।
सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से नोटिस भेजे जाने के बावजूद दोनों विपक्षी पक्ष उपस्थित नहीं हुए और न ही अपना जवाब दाखिल किया। इसके बाद आयोग ने मामले की एकपक्षीय सुनवाई की। उपलब्ध दस्तावेजों और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने माना कि बुकिंग की राशि लेने के बावजूद होटल प्रबंधन ने निर्धारित तिथि पर कमरा उपलब्ध नहीं कराया। इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(11) के तहत सेवा में कमी माना गया।
आयोग ने दिया 45 दिनों में भुगतान का आदेश
आयोग ने अपने फैसले में होटल के दोनों विपक्षी पक्षों को संयुक्त एवं पृथक रूप से 5,670 रुपये बुकिंग राशि वापस करने, मानसिक प्रताड़ना एवं असुविधा के लिए 20,000 रुपये मुआवजा और 5,000 रुपये मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया है। इस तरह कुल भुगतान की राशि 30,670 रुपये निर्धारित की गई है।
आदेश के अनुसार, फैसले की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। ऐसा नहीं करने पर बुकिंग राशि पर परिवाद दायर करने की तिथि से और मुआवजे की राशि पर निर्णय की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इस फैसले के माध्यम से आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर ग्राहकों से पैसे लेने के बाद निर्धारित सेवा उपलब्ध कराना होटल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। खासकर वरिष्ठ नागरिकों को देर रात ठहरने की व्यवस्था से वंचित करना गंभीर असुविधा और मानसिक परेशानी का कारण बन सकता है।
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