चाईबासा: आगामी 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर चाईबासा एक बार फिर आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में आयोजित होने वाले इस भव्य समारोह में झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ ओडिशा और अन्य पड़ोसी राज्यों से 25 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन में 50 से अधिक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक आदिवासी संगठन एक मंच पर आकर आदिवासी अस्मिता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक एकजुटता का संदेश देंगे।
बुधवार को सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में आयोजित संयुक्त तैयारी बैठक में कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गई। बैठक में पिछले वर्ष के आयोजन की आय-व्यय रिपोर्ट, समीक्षा और सुझावों को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद वर्ष 2026 के आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए नई आयोजन समिति का गठन किया गया। समिति ने निर्णय लिया कि प्रत्येक बुधवार और शनिवार को तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में तय किया गया कि इस वर्ष का आयोजन पहले से अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध होगा। हो, मुंडा, संथाल, उरांव, भूमिज, लोहरा, बिरहोर सहित विभिन्न जनजातीय समुदाय अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन समिति ने सभी प्रतिभागियों से पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। पूरे चाईबासा शहर को सरना ध्वजों से सजाया जाएगा और समारोह का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा, ताकि दूर-दराज के लोग भी कार्यक्रम से जुड़ सकें।
कार्यक्रम में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के जनजातीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण होंगी। मांदर वादन, पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक ऑर्केस्ट्रा दर्शकों को आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत से रूबरू कराएंगे। इसके अलावा आदिवासी इतिहास, हस्तशिल्प, वन उत्पाद, स्थानीय उद्यम और पारंपरिक जीवनशैली पर आधारित 50 से अधिक प्रदर्शनी एवं बिक्री स्टॉल लगाए जाएंगे।
समारोह के दौरान खेल, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, कला, संस्कृति, सामाजिक सेवा और पशुपालन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। समाज के वरिष्ठजन, बुद्धिजीवी और युवा आदिवासी समाज के वर्तमान और भविष्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार भी साझा करेंगे।
आयोजन समिति ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी इतिहास, भाषा, संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक व्यापक सामाजिक अभियान है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस वर्ष भी सभी सहयोगकर्ताओं और दानदाताओं के नाम तथा उनके सहयोग राशि का विवरण कार्यक्रम स्थल पर फ्लेक्स के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।








