चाईबासा: कई गांवों में डायरिया का कहर, पांच ग्रामीणों की मौत

Chaibasa (चाईबासा) : नोवामुण्डी प्रखंड के कादोजामदा पंचायत व आसपास के गांवों में डायरिया ने भयावह रूप ले लिया है। पिछले दो दिनों में हालात इतने बिगड़े कि ग्रामीण अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब तक पांच ग्रामीणों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती हैं।

डायरिया की चपेट में आने से तीन ग्रामीणों की मौत, रिलीफ मेडिकल टीम पहुंची गांव

प्रभावित गांव और हालत

डायरिया के प्रकोप की चपेट में कादोजामदा गांव, पादापहाड़ गांव, मोहदी गांव और मुण्डासाई गांव सहित कई गांव शामिल हैं। बीमारी इतनी तेजी से फैली कि कई परिवार एक साथ बीमार हो गए। पीड़ितों को तेज़ दस्त, उल्टी और निर्जलीकरण की गंभीर शिकायत है।

डायरिया पीड़ित रोगी को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाते ग्रामीण

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही

स्थानीय लोगों का आरोप है कि डायरिया के फैलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी स्थिति से पूरी तरह अनजान थे। बीमारी फैलने के बाद भी न कोई जांच टीम भेजी गई, न ही गांव में इलाज का तत्काल इंतजाम किया गया। इस बीच मौतों की खबर आने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया।

जनप्रतिनिधियों की पहल

कादोजामदा पंचायत समिति सदस्य मंजू पूर्ति ने इस गंभीर स्थिति की जानकारी तत्काल स्थानीय विधायक सोनाराम सिंकु को दी। विधायक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन सुशांतो कुमार माझी को निर्देश दिया कि तुरंत स्वास्थ्य जांच दल भेजा जाए, मेडिकल कैंप लगे और व्यापक इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित हो। उन्होंने चेतावनी दी कि इलाज में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अस्पतालों में इलाज

विधायक के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ। इसके साथ ही टाटा स्टील नोवामुण्डी अस्पताल प्रबंधन से भी संपर्क साधा गया। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रभावित गांवों के मरीजों को अस्पताल तक लाने की व्यवस्था शुरू की। अब तक 8-10 गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। इनमें से 4-5 मरीज आईसीयू में हैं। अस्पताल में सभी का इलाज चल रहा है और हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मौतों का आंकड़ा और माहौल

डायरिया के इस भीषण प्रकोप में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे गांवों में मातम का माहौल है। मृतकों के परिजन सदमे में हैं, वहीं ग्रामीणों में भय का माहौल है कि बीमारी और न फैले।

प्रशासन की चुनौती

स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती है कि बीमारी को जल्द नियंत्रित किया जाए, संक्रमितों को समय पर इलाज मिले और गांवों में स्वच्छ पानी व साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित हो, ताकि आगे कोई और जान न जाए।

सीएस ने किया इनकार

सिविल सर्जन सुशांतो कुमार माझी ने कहा डायरिया ग्रामीणों की मौत पुष्टि नही करता हूँ। क्योंकि मेरी टीम क्षेत्र में है और अभी तक ऐसी कोई सूचना मुझे नही मिली है। ये हो सकता है कि किसी अन्य कारणों से ग्रामीण की मौत हुई होगी लेकिन उसे डायरिया का नाम देना गलत होगा।

http://Chaibasa: डायरिया फैलने से एक की मौत, दो दर्जन से ज्यादा आक्रांत