नया गांव में जमीन सीमांकन को लेकर भारी हंगामा, ग्रामीणों के विरोध के आगे झुका प्रशासन; बैरंग लौटी टीम

"नोवामुंडी के नया गांव में जमीन सीमांकन का विरोध करते ग्रामीण और मौजूद पुलिस बल।"

नोवामुंडी (बड़ाजामदा) : पश्चिम सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत दिरीबुरु पंचायत के नया गांव में शुक्रवार को जमीन सीमांकन (Demarcation) के दौरान भारी तनाव देखा गया। ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध और तीखी नोकझोंक के कारण प्रशासनिक टीम को अपनी कार्रवाई बीच में ही रोककर वापस लौटना पड़ा।

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"नोवामुंडी के नया गांव में जमीन सीमांकन का विरोध करते ग्रामीण और मौजूद पुलिस बल।"

क्या है पूरा मामला?

​जानकारी के अनुसार, अंचल अधिकारी (CO) के आदेश पर केशनी बारिक नामक ग्रामीण की भूमि का सीमांकन किया जाना था। मामला दिरीबुरु मौजा के नया गांव (खाता संख्या 95, प्लॉट संख्या 1459 और 1460) की कुल 12 डिसमिल जमीन से जुड़ा है। सीमांकन की प्रक्रिया के लिए प्रखंड और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम गांव पहुंची थी।

प्रशासनिक लवाजमे को ग्रामीणों ने घेरा

​सर्किल इंस्पेक्टर विनोद कुमार के नेतृत्व में राजस्व उप निरीक्षक और बड़ाजामदा ओपी की पुलिस टीम जब गांव पहुंची, तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट थे। टीम के साथ स्थानीय पारंपरिक प्रतिनिधि जैसे दिरीबुरु मुंडा नरेश चाम्पिया, बड़ाजामदा मुंडा दिगंबर चातोम्बा और मानकी साजन चातोम्बा भी मौजूद थे।

​जैसे ही सीमांकन की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की गई, ग्रामीणों ने जमीन पर अपना दावा और आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों का रुख देखते हुए स्थिति बिगड़ने की आशंका को भांपते हुए टीम को पीछे हटना पड़ा।

"नोवामुंडी के नया गांव में जमीन सीमांकन का विरोध करते ग्रामीण और मौजूद पुलिस बल।"

इन लोगों ने किया विरोध का नेतृत्व

​सीमांकन का विरोध करने वालों में मुख्य रूप से निम्नलिखित ग्रामीण शामिल थे:

  • ​महेन्द्र महाकुड़, योगी बारिक, त्रीनाथ बारिक, अरुण बारिक, घासीराम बारिक, पांडवा महाकुड़, अग्रवाल बारिक और लखींद्र महाकुड़।

"नोवामुंडी के नया गांव में जमीन सीमांकन का विरोध करते ग्रामीण और मौजूद पुलिस बल।"

प्रशासन का पक्ष

​प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सीमांकन की कार्रवाई सरकारी आदेशानुसार की जा रही थी। फिलहाल स्थिति को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया है। मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी और सभी पक्षों को सुनने के बाद विधि-सम्मत (Legal) तरीके से आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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