टाटा स्टील को झारखंड विद्युत नियामक आयोग का झटका, 11.82 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश

टाटा स्टील RPO मामला

रांची/जमशेदपुर:* झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) ने रिन्यूएबल पर्चेज ऑब्लिगेशन (RPO) से जुड़े मामले में टाटा स्टील लिमिटेड की मांग स्वीकार नहीं की है। आयोग ने कंपनी की याचिका खारिज करते हुए 11 करोड़ 82 लाख 29 हजार 146 रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी को आदेश जारी होने के 30 दिनों के भीतर यह राशि झारखंड आरपीओ चार्ज रेगुलेटरी फंड में जमा करनी होगी।

इस फैसले का संबंध जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील के कैप्टिव पावर प्लांट और निर्धारित नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्वों के अनुपालन से है।

### क्या थी टाटा स्टील की मांग?

टाटा स्टील ने वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2013-14 के दौरान बने RPO दायित्वों को बाद के वित्तीय वर्षों में किए गए अतिरिक्त अनुपालन के आधार पर समायोजित करने की मांग की थी। कंपनी ने अपने कैप्टिव पावर प्लांट को को-जेनरेशन प्लांट के रूप में मान्यता देने और संबंधित दायित्वों में छूट देने का पक्ष भी रखा था।

कंपनी की दलील थी कि वर्ष 2014-15 से 2019-20 के बीच किए गए अतिरिक्त अनुपालन को पहले के वर्षों की देनदारी के विरुद्ध समायोजित किया जाना चाहिए। मामले से जुड़ी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने का हवाला देते हुए कंपनी ने कार्रवाई से राहत देने का अनुरोध भी किया था।

### जरेडा ने किया कंपनी की दलीलों का विरोध

झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (JREDA) ने कंपनी की मांग पर आपत्ति जताई। एजेंसी का पक्ष था कि निर्धारित RPO लक्ष्यों का पालन करना संबंधित उपभोक्ता की जिम्मेदारी है। इन दायित्वों के अनुपालन और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

### APTEL के फैसले का रहा अहम प्रभाव

मामले में अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) के 27 जनवरी 2025 के आदेश को महत्वपूर्ण माना गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, ट्रिब्यूनल ने पहले दिए गए उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत टाटा स्टील को संबंधित छूट मिली थी।

ट्रिब्यूनल के फैसले में जीवाश्म ईंधन आधारित को-जेनरेशन से उत्पन्न बिजली को नवीकरणीय ऊर्जा के बराबर मानकर RPO दायित्वों में स्वतः छूट देने के तर्क को स्वीकार नहीं किया गया।

### सुप्रीम कोर्ट में अपील, लेकिन रोक नहीं

विद्युत नियामक आयोग ने अपने आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित होने मात्र से ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक नहीं लग जाती। जब तक सक्षम अदालत की ओर से कोई स्थगन आदेश नहीं दिया जाता, तब तक लागू कानूनी निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।

आयोग ने यह भी माना कि पहले के वर्षों की RPO देनदारी को बाद के वर्षों के अतिरिक्त अनुपालन से स्वतः समायोजित करने का प्रावधान उपलब्ध नियमों में नहीं है।

### 30 दिनों में जमा करनी होगी राशि

आयोग के निर्देश के अनुसार, टाटा स्टील को 11,82,29,146 रुपये निर्धारित झारखंड RPO चार्ज रेगुलेटरी फंड में जमा करने होंगे। यह राशि नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्रों (REC) की खरीद से संबंधित व्यवस्था के लिए उपयोग की जाएगी।

निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई हो सकती है।

*कुल मिलाकर, यह आदेश टाटा स्टील के पुराने RPO दायित्वों और उनके समायोजन से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब कंपनी की ओर से भुगतान और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।*

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