JPSC ने 17 वर्ष के बाद निकला में रिजल्ट, प्रधान लिपिक हुई सफल, बधाई का लगा तांता

Chaibasa:- झारखंड लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रथम उपसमाहर्ता (सीमित) प्रतियोगिता परीक्षा 2006 में झींकपानी प्रखंड अंतर्गत अंचल कार्यालय में पदास्थापित प्रधान लिपिक विजयलक्ष्मी सिंकू ने सफलता प्राप्त की है. उनकी इस सफलता से अंचल एवं प्रखंड के कर्मियों में हर्ष व्यापत है. अंचलाधिकारी अनुप कच्छप एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रभात रंजन चौधरी ने हर्ष जताते हुए विजयलक्ष्मी सिंकू को पुष्प भेंटकर बधाई दी.

 

इस मौके पर अंचल एवं प्रखंड के कर्मियों ने भी बधाई दी.बता दें की कुछ दिनों पूर्व ही उनकी पदोन्नति के लिए कार्यालय अधीक्षक पद की अनुशंसा भी की गई है.
लेकिन JPSC के इस परिणाम को जारी किया जाना ऐतिहासिक बन चुका है, क्योंकि प्रथम उप समाहर्ता (सीमित) प्रतियोगिता परीक्षा 17 साल में पूरी हुई है. झारखंड लोक सेवा आयोग ने शनिवार 14 जनवरी 2023 को इस परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी कर दिया है. इसमें उप समाहर्ता डिप्टी कलेक्टर के 50 पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा राज्य सरकार को की गई है.

बता दें कि झारखंड लोक सेवा आयोग ने वर्ष 2005 में ही 50 पदों के लिए प्रथम सीमित उप समाहर्ता प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन जारी किया था. 30 अप्रैल 2006 को राजधानी के 16 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई थी. बाद में परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर विवाद भी हुआ था. मामला कोर्ट में भी गया. इस बीच तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने इस परीक्षा की निगरानी जाँच का आदेश दे दिया. निगरानी जाँच रिपोर्ट के आधार पर 12 जून 2013 को परीक्षा रद्द कर दी गई, बाद में राज्य सरकार ने यह परीक्षा नए सिरे से आयोजित करने का निर्णय लिया. जिसके आलोक में फिर से परीक्षा लेने की सूचना जारी की गई. इसके बाद 2020 जनवरी को यह परीक्षा आयोजित की गई. जिसमें 4000 कर्मी शामिल हुए. परीक्षा आयोजित होने के बाद भी इसके परिणाम जारी करने में तीन साल लग गए. जबकि सफल कर्मियों में में कई ऐसे भी कर्मी है जो अगामी 2-4 में ही सेवानिवृत भी हो जाऐंगे.बता दें कि उपसमाहर्ता परीक्षा में राज्य सरकार के स्थायी कर्मी ही शामिल होते हैं.


विजय लक्ष्मी सिंकू मूल रूप से हाटगम्हरिया प्रखंड, गाँव कुलाबुरु की निवासी हैं. वर्तमान में वे चाईबासा, सरनाडीह में निवास करती है. परिश्रमी, व्यवहार कुशल एवं मृदुभाषी होने के कारण वे समाज में काफी नामचीन भी है. इसलिए उनके इस सफलता से लोग काफी खुश है।साथ इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वालों में अनुसूचित जनजाति,”हो” वर्ग में अकेली अभ्यर्थी हैं. वो बताती है कि घर और फोन पर बधाईयों का ताताँ लगा हुआ है.


उन्होंने विभागीय कर्मियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश देते हुए कहा है कि पढ़ाई का अभ्यास जारी रखें और कभी भी हतोत्साहित न हो.

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