आदिवासी दर्जे की मांग पर कुड़मी समाज की सरकार को जगाने की हैं तैयारी
आदित्यपुर: कुड़मी समाज को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। इसी क्रम में 20 सितंबर को झारखंड, बंगाल और उड़ीसा की सीमावर्ती इलाकों के करीब 100 स्थानों पर रेल रोको अभियान चलाया जाएगा। आंदोलन के तहत हजारों की संख्या में लोग रेलवे पटरियों पर उतरेंगे और ट्रेनों का परिचालन ठप करेंगे।
कुड़मी सेना (टोटेमिक) के केंद्रीय अध्यक्ष लालटू महतो ने कहा कि हमारे पूर्वज मूल रूप से आदिवासी थे, लेकिन आज़ादी के बाद हमें जबरन पिछड़ी जाति (ओबीसी) में शामिल कर दिया गया। इस कारण कुड़मी समाज अपने हक और अधिकार से लंबे समय से वंचित है। उन्होंने बताया कि समाज पिछले 78 वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहा है।
लालटू महतो ने स्पष्ट किया कि इस बार का आंदोलन सरकार को जगाने का काम करेगा। 20 सितंबर को पूरे राज्यभर में गांव-गांव से लोग अपने घर छोड़कर रेल पटरी पर डेरा डालेंगे और आंदोलन को सफल बनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा धारा 144 लागू करने और 107 की नोटिस भेजकर समाज के लोगों को डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कुड़मी समाज किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाला नहीं है। लालटू महतो ने सरकार को चेतावनी दी कि जब तक कुड़मी समाज को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस महाअभियान के दौरान रेल चक्का जाम के कारण पूरे राज्य में रेल परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है।








