चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा के मंगला हाट स्थित मानकी मुंडा रेस्ट हाउस में मानकी मुंडा संघ कोल्हान पोड़ाहाट केंद्रीय कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष गणेश पाठ पिंगुवा ने की।
बैठक में झारखंड पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्र) नियमावली 2025 पर विस्तृत चर्चा की गई और इसे असंवैधानिक बताते हुए सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया। संघ ने झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा 2 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 01स्था.(वि.)166/2013 (खंड-1) के माध्यम से नियमावली को दी गई संवैधानिक स्वीकृति पर गंभीर आपत्ति जताई।
संघ का कहना है कि पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम 1996 (पेसा) की धारा 5 के अनुसार अधिनियम के गजट में प्रकाशित होने के एक वर्ष के भीतर नियमावली बनाना अनिवार्य था, जबकि झारखंड सरकार ने लगभग 29 वर्षों बाद नियमावली अधिसूचित की है, जो संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।
बैठक में यह भी कहा गया कि पेसा अधिनियम 1996 संसद द्वारा पारित और राष्ट्रपति द्वारा अनुमोदित एक विशेष कानून है, जो केवल अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू होता है, जबकि झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 राज्य विधानसभा द्वारा पारित एक सामान्य कानून है, जिसे सभी क्षेत्रों के लिए बनाया गया है।
संघ ने आरोप लगाया कि नियमावली 2025 में ग्राम सभा की परिभाषा झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 की धारा 3 के आधार पर की गई है, जबकि पेसा अधिनियम 1996 की धारा 4(म)(i) से 4(म)(vii) तक ग्राम सभा को सात विशिष्ट अधिकार प्रदान किए गए हैं, जिनका नियमावली में उल्लंघन किया गया है।
इसके अतिरिक्त, नियमावली में लगभग 25 अन्य अधिनियमों और नियमावलियों को सम्मिलित करना संविधान की पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों के विपरीत बताया गया।
बैठक में सरकार से मांग की गई कि पेसा अधिनियम 1996 की धारा 3, धारा 4(म) तथा धारा 5 के अनुरूप अनुसूचित क्षेत्रों में स्वशासी परिषद का गठन किया जाए तथा निचले स्तर पर सशक्त ग्राम सभा की स्थापना के लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाए।
बैठक में कृष्णा सामाड मानकी, कामिल केराई मानकी, ललित सावैंया मानकी, दलप देवगम मानकी, कृष्णा सिंकू, सुशील कुमार सिंकु, सूबेदार देवगम, बागुन सोय मानकी, प्रभु सहाय देवगम सहित बड़ी संख्या में मानकी-मुंडा और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
संक्षेप में मुख्य बिंदु
पेसा नियमावली 2025 को असंवैधानिक बताते हुए खारिज
नियमावली 29 वर्ष बाद लाने पर आपत्ति
ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
पाँचवीं अनुसूची के खिलाफ अन्य कानूनों को जोड़ने का विरोध
स्वशासी परिषद और सशक्त ग्राम सभा गठन की मांग


