चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम): पश्चिमी सिंहभूम हाथी आतंक ताजा खबर के बीच बुधवार को राहत की स्थिति सामने आई है। झुंड से बिछड़े दंतैल जंगली हाथी द्वारा पिछले सात दिनों तक मचाए गए कहर के बाद आठवें दिन अब तक किसी भी नए जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, जिससे ग्रामीणों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है।हालांकि, खतरा पूरी तरह टला नहीं है और वन विभाग अलर्ट मोड में बना हुआ है।
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सात दिनों में 17 लोगों की गई जान, गांवों में दहशत का माहौल
बीते एक सप्ताह के दौरान हाथी ने जिले के विभिन्न गांवों में अचानक हमला कर 17 ग्रामीणों की जान ले ली। कई कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और खेतों में लगी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। लगातार हो रही घटनाओं के कारण लोग शाम होते ही घरों में दुबकने को मजबूर हैं और कई गांवों में अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी बिना किसी उकसावे के हमला कर रहा है, जिससे महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक भयभीत हैं।

बाहरी राज्यों से बुलाई जा रही विशेषज्ञ रेस्क्यू टीमें
हाथी को काबू में करने और उसे सुरक्षित वन क्षेत्र में पहुंचाने के लिए वन विभाग ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है।
इस संबंध में डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि झुंड से बिछड़े हाथी को नियंत्रित करने के लिए बाहर से विशेष प्रशिक्षित टीमों को बुलाया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल से प्रशिक्षित वनकर्मी दल, ओडिशा से हाथी प्रबंधन में दक्ष विशेषज्ञ और गुजरात स्थित वनतारा से रेस्क्यू टीम को तैनात करने की प्रक्रिया जारी है, ताकि हाथी को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सके।
माइकिंग के जरिए ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील
वन विभाग द्वारा प्रभावित गांवों में लगातार माइकिंग कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। ग्रामीणों से कहा गया है कि वे रात में घरों से बाहर न निकलें, सुबह अंधेरे में शौच या खेत की ओर न जाएं और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना प्रशासन को दें।
इसके बावजूद कई ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सुबह-सुबह बाहर निकल रहे हैं, जिससे जोखिम और बढ़ रहा है।
ड्रोन और ट्रैकिंग से हो रही हाथी की निगरानी
वन विभाग की टीमें ड्रोन कैमरों और अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद से हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारी लगातार जंगल और गांवों के बीच के इलाकों में गश्त कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि हाथी अभी भी क्षेत्र में मौजूद है, इसलिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
मृतकों के परिजनों को मुआवजा, घायलों का इलाज जारी
जिला प्रशासन ने हाथी हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। घायलों का इलाज जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता दी जाएगी।
जंगल कटाई से बढ़ा मानव-हाथी संघर्ष, सुरक्षा पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों की अवैध कटाई और प्राकृतिक आवास के नष्ट होने के कारण हाथी भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में गांवों की ओर आ रहे हैं। जंगल में पर्याप्त चारा नहीं मिलने के कारण हाथी आबादी वाले इलाकों में घुसने को मजबूर हो रहे हैं। इसी वजह से मानव-हाथी संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालात पर नजर, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं
फिलहाल आठवें दिन कोई नई घटना नहीं होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन प्रशासन मानता है कि जब तक हाथी को पूरी तरह नियंत्रित कर सुरक्षित वन क्षेत्र में नहीं भेजा जाता, तब तक स्थिति सामान्य नहीं कही जा सकती। वन विभाग की टीमें 24 घंटे निगरानी में जुटी हुई हैं और प्रभावित इलाकों में अलर्ट जारी है।
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