कुंदूबेड़ा में थाना या सीआरपीएफ कैंप आदि के लिये जमीन अधिग्रहण का ग्रामीणों ने किया विरोध

 

 

 

 

ग्रामसभा में पुलिस विभाग व भूतत्व विभाग को खूंटकट्टी सामुदायिक भूमि नहीं देने का हुआ निर्णय

 

 

 

चाईबासा : सदर प्रखंड के कुंडुबेडा गांव में शनिवार को ग्रामसभा आयोजित कर सरकारी योजना जैसे थाना, सीआरपीएफ कैंप आदि के लिये गांव की जमीन नहीं देने का ऐलान किया।

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दरअसल सदर अंचल कार्यालय द्वारा नोटिस जारी कर ग्रामीणों से सरकारी योजना के लिये जमीन लेने संबंधी राय मांगी गयी थी। इसी के आलोक में शनिवार को यह बैठक हुई और जमीन नहीं के पक्ष में फैसला लिया गया। ग्रामसभा की अध्यक्षता ग्रामीण मुंडा अर्जुन पुरती ने की। बैठक में कई प्रस्ताव पारित हुए। सदर अंचलाधिकारी के दिनाँक 26.02.2024 के तहत खाता संख्या-01 प्लॉट स०-1555 रकवा -1 एकड़ भूमि अधिग्रहण/बंदों बस्ती हेतु नोटिस के आलोक में ग्राम सभा ने निर्णय लिया और कहा कि भूमि खूंटकट्टी सामुदायिक भूमि हैं। जो हमारे पूर्वजों द्वारा जंगल झाड़ पहाड़ों को काट कर बनाया गया है। उस भूमि पर पहला हक ग्राम सभा का हैं। जो भावी पीढ़ियों के रोजगार गारंटी हेतु काम आयेंगे। इसलिए श्रम अधीक्षक को जमीन नहीं देने का प्रस्ताव लिया. जो ध्वनि मत से पारित किया गया। वहीं दिनाँक 26.02.2024 के सदर अंचलाधिकारी द्वारा मौज़ा कुंडुबेडा खाता -01,प्लॉट न०1976 व 1980 रकवा-05.00एकड़ भूमि पुलिस विभाग द्वारा अधिग्रहण करने संबंधी नोटिस के आलोक में ग्राम सभा ने निर्णय लिया कि ग्राम सभा पुलिस थाना, पुलिस लाइन या सी आर पी एफ जैसी किसी भी संस्था को ग्राम कुंडुबेडा क्षेत्र में अंचलाधिकारी सदर द्वारा जारी नोटिस का विरोध करती हैं और पुलिस अधीक्षक, पुलिस थाना अथवा सी आर पी एफ जैसी संस्थाओं को एक इंच भूमि अधिग्रहण के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया। यह प्रस्ताव भी ध्वनिमत से पारित हुआ। बैठक में कहा गया कि ग्रामसभा द्वारा पारित विरोध प्रस्तावों की लिखित जानकारी सदर अंचलाधिकारी, सदर अनुमंडल पदाधिकारी व उपायुक्त को भी दी जायेगी। 

जमीन पूर्वजों की है नहीं देंगे : सावैयां

 

 

 बैठक में कोल्हान भूमि बचाओ समिति भी आमंत्रित थी। समिति के अध्यक्ष बिनोद कुमार सावैयां ने सरकार की कोई जमीन इस मौज़ा में नहीं है, जो परती व खाली हो। यह जमीन सरकार ने नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों ने जंगल-झाड़ साफ कर खेती लायक बनायी थी। ऐसे में ये जमीन खाता संख्या-01 में कैसे दर्ज कर ली गयी? यह जमीन 1913-14 में हमारी थी, तो 1964 में बिहार सरकार अनाबाद कैसे हो गई? यह जाँच का विषय है। सभी सरकारें बाहरी लोगों की लगातार बढ़ती आबादी के लाभ के लिए ही कार्य करती है। हम आदिवासी मूलवासियों के हक अधिकार को लूटने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। सिंहभूम में भी आदिवासियों के जमीन लूटने में आदिवासी अधिकारियों, सांसद विधायकों सभी के बराबर भागीदारी हैं।हाल के दिनों 16 गाँव से बनने जा रही 18 किलोमीटर रिंग रोड का निर्माण जिसका प्रस्ताव विगत दिनों कांग्रेस पार्टी छोड़ भाजपा की टिकट पर लोकसभा चुनाव में आपको पुनः ठगने वापस लौट आई हैं, ऐसे समाज और समुदाय के गद्दार नेताओं को पहचानने की आवश्कयता हैं, श्री बिनोद कुमार सावैयां ने आगे कहा जिस तरह हम लोग 16 गाँव से गुजरने वाली 18किलोमीटर रिंग रोड के विरुद्ध हैं वैसे ही मौज़ा कुंडुबेडा में सरकारी विभागों को मौज़ा स्थित खूंटकट्टी सामुदायिक भूमि दिये जाने के विरोध में है। क्योंकि 2040 के मास्टर प्लान में अवैध रूप से 5वीं अनुसूची क्षेत्र कार्यरत चाईबासा नगर पालिका ने 15किलोमीटर दूर तक की आदिवासी गांवों को भी अपने दायरे में समेटने का गैरकानूनी कार्य शुरू कर दिया है, इसलिए सरकारों/ नेताओं/ राजनीतिक दलों/अधिकारियों पर कड़ी नज़र रखनी होगी।

बैठक में अध्यक्ष बिनोद कुमार सावैया अध्यक्ष ,कोल्हान भूमि बचाओ समिति के विधि सलाहकार सुरेश चंद्र सोय, उपाध्यक्ष डिबर देवगम, भगवान देवगम, विशाल देवगम, चाहत देवगम, सुखलाल सावैया, रोशन पुरती, मंगल सिंह पुरती, देवेंद्र बानरा, करण पुरती, विश्वनाथ पुरती, घनश्याम पुरती, जयसिंह पुरती, गुरूचरण पुरती, चुंबरू पुरती, शामु पुरती, सूले पुरती, डेबरा कालुंडिया, गंगाराम पुरती, चैतन्य पुरती समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।

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