गोइलकेरा हाट परिसर में बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने आदिवासी अधिकारों के संघर्ष को किया याद
Chaibasa (चाईबासा) : जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले जननेता एवं पूर्व विधायक शहीद देवेंद्र माझी का बलिदान आज भी कोल्हान की धरती पर संघर्ष, स्वाभिमान और अधिकारों की प्रेरणा बना हुआ है। बुधवार, 14 अक्टूबर को गोइलकेरा हाट परिसर में उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), विभिन्न सामाजिक संगठनों और हो साहित्यकारों ने वीर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
शहीदों के बलिदान को नमन, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया संकल्प
अन्याय के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा देते रहेंगे देवेंद्र माझी
सभा में हो साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली ने शहीद देवेंद्र माझी के संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए कहा कि 14 अक्टूबर 1994 को इसी हाट परिसर में असामाजिक तत्वों ने उनकी हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि देवेंद्र माझी का शरीर भले ही मिट गया, लेकिन आदिवासियों के हक और अधिकारों के लिए उठाई गई उनकी आवाज आज भी जीवित है।
उन्होंने कहा कि देवेंद्र माझी केवल एक विधायक या राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे उन आदिवासी समुदायों की आवाज थे, जिनका जीवन जंगल, जमीन और प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपना जीवन आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा और उनके सम्मान के लिए संघर्ष करते हुए समर्पित कर दिया। उनके विचार आज भी लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देते हैं।

वनाधिकार कानून का किया उल्लेख
डोबरो बुड़ीउली ने वनाधिकार अधिनियम, 2006 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून का उद्देश्य आदिवासियों और अन्य परंपरागत वनवासियों के वन संबंधी अधिकारों को कानूनी मान्यता देना है। इसके तहत पात्र व्यक्तियों और समुदायों के व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकारों की मान्यता का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले देवेंद्र माझी जैसे जननेताओं के बलिदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए। उनके संघर्षों से मिली सीख को आगे बढ़ाना और आदिवासी समाज के अधिकारों के प्रति जागरूकता बनाए रखना जरूरी है।
साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि सभा में हो साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली, कवि बागुन बोदरा, संगीतकार सतीश सामड, कवि आनंद कोड़ाह, शर्मीला हेंब्रम, घनश्याम सुंडी सहित अन्य लोग उपस्थित थे। सभी ने शहीद देवेंद्र माझी के योगदान को याद करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को नमन किया।
शहीद देवेंद्र माझी का जीवन संदेश देता है कि जल, जंगल और जमीन पर अधिकारों की रक्षा का संघर्ष केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
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