राजकीय रस्सेल प्लस टू उच्च विद्यालय, जगन्नाथपुर में दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु विशेष कार्यशाला का आयोजन

Jaggannathpur (जगन्नाथपुर) : टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) की ओर से शुक्रवार को राजकीय रस्सेल प्लस टू उच्च विद्यालय, जगन्नाथपुर में दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में दृष्टिहीन, मूक-बधिर तथा अन्य दिव्यांग बच्चों की शैक्षणिक, मानसिक एवं कौशल विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण गतिविधियाँ संपन्न कराई गईं।

कार्यशाला का संचालन TSF के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा किया गया, जिन्होंने सांकेतिक भाषा शिक्षा, खेल प्रशिक्षण और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के आत्मविश्वास एवं सीखने की क्षमता को मजबूती देने पर विशेष जोर दिया। बच्चों को लूडो, चेस, साँप-सीढ़ी, दृष्टिहीन क्रिकेट और ब्रेसलेट निर्माण जैसी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला। प्रशिक्षकों ने बताया कि इन खेलों से बच्चों में तर्क शक्ति, टीमवर्क, मोटर स्किल्स तथा निर्णय क्षमता का विकास होता है।

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पूर्व छात्र ने दी प्रेरणादायक सफलता की मिसाल

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरक पल तब आया जब प्रशिक्षक शेखर कुमार गोप ने स्वयं को विद्यालय का पूर्व छात्र बताते हुए अपनी सफल यात्रा को साझा किया। उन्होंने बताया—
“मैंने वर्ष 2015 में इसी विद्यालय में कक्षा 9 में प्रवेश लिया था। उस समय मेरे गुरुजी जिज्ञासु बेहरा ने मुझे मूकबधिर विद्यालय में जाकर विशेष शिक्षा प्राप्त करने की सलाह दी। उनके मार्गदर्शन की बदौलत आज मैं झारखंड की दृष्टिहीन फुटबॉल टीम का कप्तान हूँ। मेरे लिए जिज्ञासु सर आज भी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।”

शेखर की सफलता की कहानी ने उपस्थित बच्चों और शिक्षकों में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार किया तथा यह सिद्ध किया कि उचित संसाधन और अवसर मिलने पर दिव्यांग बच्चे भी उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त कर सकते हैं।

सांकेतिक शिक्षा और डिजिटल स्किल्स पर विशेष फोकस

कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षक सोनी हेम्ब्रम ने बताया कि टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा दिव्यांग बच्चों के लिए विभिन्न विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें—

  • सांकेतिक भाषा के माध्यम से शिक्षा

  • स्मार्टफोन एवं कंप्यूटर संचालन

  • डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण

  • आत्मनिर्भरता से जुड़े व्यावहारिक कौशल

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ना तथा उन्हें आत्मविश्वास के साथ सम्मानजनक जीवन जीने में सक्षम बनाना है।

प्रशिक्षकों की सक्रिय भूमिका

कार्यशाला के संचालन में सोनी हेम्ब्रम, शेखर कुमार गोप, धीरज कुम्हार, रश्मिता नायक और जानो बारजो ने सक्रिय योगदान दिया। सभी प्रशिक्षकों ने कौशल आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को प्रेरित किया तथा आगे बढ़ने का उत्साह प्रदान किया।


यह कार्यशाला न केवल दिव्यांग बच्चों के कौशल को निखारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, बल्कि समाज में उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी सशक्त करने का माध्यम बनी।

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