मझगांव में हाथियों के झुंड ने युवक को कुचल कर मार डाला, क्षेत्र में दहशत

युवक को कुचलता हाथियों की झुंड

Chaibasa (चाईबासा) : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां हाथियों के झुंड ने एक युवक पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। मृतक की पहचान राजू पुरती, पिता मालो पुरती, ग्राम सादमासाई, पंचायत आसनपाट, प्रखंड मझगांव निवासी के रूप में हुई है। घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत और शोक का माहौल पैदा कर दिया है।

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 कैसे हुई घटना

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गुरुवार सुबह लगभग 8 बजे हाथियों का एक बड़ा झुंड गांव के खेतों में घुस आया था। खेतों को नुकसान से बचाने के लिए गांव के कुछ युवक हाथियों को भगाने पहुंचे। इसी दौरान झुंड ने अचानक पलटकर हमला कर दिया।
भागने के प्रयास में राजू पुरती फिसलकर गिर गया, जिससे वह उठ नहीं सका। तभी एक हाथी ने उसे कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल राजू ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

यह दृश्य देखकर ग्रामीण दहशत में आ गए और शोर मचाते हुए अन्य युवक किसी तरह जान बचाकर भागे।

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ग्रामीणों में दहशत

घटना के बाद सादमासाई गांव सहित आसपास के टोले-मोहल्लों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से हाथियों का झुंड लगातार क्षेत्र में घूम रहा है।
रात होते ही लोग घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। फसलों को भी भारी नुकसान हो रहा है।

सूचना पर वन विभाग की टीम पहुँची

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। विभाग ने मृतक के परिजनों को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत मिलने वाली सहायता राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वन कर्मियों ने ग्रामीणों से हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील भी की है।

परिवार शोकाकुल, प्रशासन से सुरक्षा की मांग

राजू पुरती की अचानक मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। गांव के लोगों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि हाथियों की बढ़ती गतिविधियों पर तत्काल नियंत्रण किया जाए, गांव में नियमित वन विभाग की पेट्रोलिंग हो, मृतक परिवार को शीघ्र मुआवजा राशि प्रदान की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार की घटनाओं से उनकी जान जोखिम में है।

युवक को कुचलता हाथियों की झुंड
युवक को कुचलता हाथियों की झुंड

लगातार बढ़ रहा मानव–हाथी संघर्ष

पश्चिमी सिंहभूम में पिछले कुछ वर्षों से मानव–हाथी संघर्ष में तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन और पानी की कमी, प्राकृतिक मार्ग अवरुद्ध होना और मानवीय हस्तक्षेप बढ़ना इन संघर्षों के मुख्य कारण हैं।
वन विभाग की कई टीमों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, फिर भी घटनाएँ कम नहीं हो रही हैं।

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