चाईबासा। महिला कॉलेज चाईबासा के इतिहास विभाग में आईक्यूएसी (IQAC) के तत्वावधान में 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में आत्मविश्वास, जागरूकता और नारी सशक्तिकरण के प्रति प्रेरणा उत्पन्न करना था।
गुवा सेल महिला समिति अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम: महिलाओं की प्रतिभा को मिला मंच
कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज की प्राचार्य डॉ. प्रीति बाला सिंहा तथा अन्य शिक्षकगण द्वारा दीप प्रज्वलन कर की गई। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. प्रीति बाला सिंहा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता के लिए चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने छात्राओं को अपने जीवन में कुछ सार्थक करने और समाज में सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में आईक्यूएसी समन्वयक एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. अमृता जायसवाल ने प्राचीन भारतीय सभ्यता से लेकर आधुनिक काल तक महिलाओं की स्थिति और उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय समाज में महिलाओं ने हर दौर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही उन्होंने पश्चिमी सभ्यता के नारीवाद और भारतीय नारीवाद के बीच अंतर पर भी चर्चा करते हुए तुलनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर डॉ. ललिता सुंडी ने महिलाओं की स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ को समझाते हुए कहा कि सच्ची आजादी आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान से आती है। वहीं डॉ. अंजना सिंह ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम में अन्य विभागों के शिक्षक भी उपस्थित रहे, जिनमें सहायक प्राध्यापक सोना माई सुंडी, डॉ. मीरा कुमारी सहित कई शिक्षकगण शामिल थे।
इस अवसर पर इतिहास विभाग के छात्रों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। छात्र-छात्राओं ने भाषण और वक्तव्य प्रस्तुत किए तथा नारी सशक्तिकरण विषय पर आकर्षक पेंटिंग्स बनाकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का माहौल उत्साह और प्रेरणा से भरपूर रहा, जहाँ सभी ने महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देने और समाज में उनकी भूमिका को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
http://अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: महिलाओं को जागरूक और स्वावलंबी बनने का आह्वान








