Chaibasa Compassionate Appointment 2026: उग्रवादी घटनाओं के पीड़ित परिवारों को मिली नौकरी

Chaibasa Compassionate Appointment

Chaibasa Compassionate Appointment 2026 के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन ने उग्रवादी घटनाओं में मारे गए व्यक्तियों के आश्रितों को बड़ी राहत देते हुए अनुकम्पा के आधार पर सरकारी नौकरी प्रदान की है। यह कदम राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और पीड़ित परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति का निर्णय

जानकारी के अनुसार, गुदड़ी थाना क्षेत्र में 12 जनवरी 2018 को श्री सादो बारजो तथा आनंदपुर थाना क्षेत्र में 27 मार्च 2020 को श्री नमन बुढ़ की उग्रवादी घटनाओं में हत्या कर दी गई थी। इन घटनाओं के बाद उनके आश्रितों को सरकारी प्रावधानों के तहत अनुकम्पा नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया।

जिला स्तरीय अनुकम्पा समिति की बैठक 26 सितंबर 2025 और 20 मार्च 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें पुलिस अधीक्षक के प्रस्ताव के आधार पर नियुक्ति को मंजूरी दी गई।

Chaibasa Compassionate Appointment

आश्रितों को मिला रोजगार का सहारा

इस निर्णय के तहत मृतक सादो बारजो की पत्नी श्रीमती एसरन सोय और मृतक नमन बुढ़ के पुत्र विकास बुढ़ को निम्नवर्गीय लिपिक (Lower Division Clerk) के पद पर नियुक्ति प्रदान की गई।

यह नियुक्ति न केवल उनके परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनेगी, बल्कि उनके पुनर्वास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उपायुक्त और एसपी ने सौंपा नियुक्ति पत्र

जिला समाहरणालय, चाईबासा स्थित उपायुक्त कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में Chandan Kumar और Amit Renu ने दोनों चयनित आश्रितों को नियुक्ति पत्र सौंपा।

इस दौरान अधिकारियों ने आश्रितों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ कार्य करने की सलाह दी।

पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में कदम

Chaibasa Compassionate Appointment 2026 राज्य सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जिसके तहत हिंसा या उग्रवादी घटनाओं में प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान की जाती है। यह पहल पीड़ित परिवारों को न केवल आर्थिक मजबूती देती है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद करती है।

 निष्कर्ष

कुल मिलाकर, Chaibasa Compassionate Appointment 2026 एक मानवीय और संवेदनशील पहल है, जो प्रशासन की जवाबदेही और पीड़ितों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस तरह के कदम समाज में विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करते हैं।

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