गोइलकेरा | संवाददाता: पश्चिमी सिंहभूम के गोइलकेरा में बालू परिवहन को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और ट्रैक्टर चालकों का आरोप है कि एक ओर बालू ढो रहे ट्रैक्टरों पर लगातार कार्रवाई कर उन्हें जब्त कर खनन विभाग के हवाले किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बालू से लदे हाईवा वाहनों को बिना किसी रोक-टोक के गुजरने दिया जा रहा है। इस कथित दोहरे रवैये को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार रात करीब 10 बजे बालू लदे दो हाईवा गोइलकेरा थाना क्षेत्र से गुजर रहे थे। संदेह होने पर स्थानीय लोगों ने दोनों वाहनों को रोक लिया और प्रशासन से सवाल किया कि जब ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू परिवहन पर कार्रवाई की जा रही है, तो आखिर हाईवा किस नियम के तहत संचालित हो रहे हैं।
सूचना मिलने पर गोइलकेरा थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक थाना प्रभारी ने बताया कि दोनों हाईवा वैध चालान के आधार पर बालू का परिवहन कर रहे हैं। इसके बाद वाहनों को आगे जाने दिया गया। हालांकि, ग्रामीण इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित बालू का स्टॉक दलकी गांव में है और वाहन सेरेंगदा घाट से होकर गोइलकेरा थाना के सामने से गुजर रहे थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाईवा में क्षमता से अधिक बालू लादा जा रहा है, जबकि चालान में मात्र 300 सीएफटी का उल्लेख किया जाता है। उनका कहना है कि यदि यह सही है तो इसकी जांच कर वास्तविक मात्रा का सत्यापन कराया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा अपनाए जा रहे कथित दोहरे मापदंड से स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों और चालकों में असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि यदि सभी के लिए एक समान नियम लागू नहीं किए गए और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे सड़क जाम कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
हालांकि, इस मामले में खनन विभाग या जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन का पक्ष आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।








