जैंतगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मांग तेज, आठ पंचायतों के हजारों लोगों को बेहतर इलाज का इंतजार

जैंतगढ़ स्वास्थ्य उपकेंद्र

जैंतगढ़। जैंतगढ़ स्वास्थ्य उपकेंद्र को क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ओड़िया बहुल क्षेत्र की करीब आठ पंचायतों के हजारों लोग लंबे समय से इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। हालांकि, चिकित्सकों की कमी और बदहाल व्यवस्था के कारण स्थानीय लोगों को समुचित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्थिति यह है कि इलाज के लिए बड़ी संख्या में मरीजों को पड़ोसी राज्य ओडिशा के चंपुआ अनुमंडल अस्पताल का रुख करना पड़ता है।

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हाल के दिनों में चंपुआ अनुमंडल अस्पताल में झारखंड से पहुंचने वाले मरीजों को बाहर से दवा, इंजेक्शन, एक्स-रे और प्लास्टर ऑफ पेरिस जैसी आवश्यक सामग्री लाने के लिए कहे जाने की शिकायतें सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जब अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है, तो बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्य पर निर्भर रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।

क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अमीर हिन्दुस्तानी ने कहा कि जब तक चंपुआ अस्पताल में झारखंड के मरीजों को आसानी से इलाज मिल रहा था, तब तक लोगों ने जैंतगढ़ के अस्पताल की बदहाल स्थिति को नजरअंदाज कर दिया। अब परिस्थितियां बदल रही हैं और लोगों को अपने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है।

उन्होंने कहा कि जैंतगढ़ स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देकर आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, दवा, जांच और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि स्थानीय लोगों को इलाज के लिए चंपुआ या निजी अस्पतालों की ओर नहीं जाना पड़े।

भाजपा नेता सत्यपाल बेहरा ने कहा कि एकीकृत बिहार के समय जैंतगढ़ का अस्पताल बेहतर स्वास्थ्य संस्थानों में गिना जाता था। दूर-दराज के इलाकों से भी लोग यहां इलाज कराने आते थे। लेकिन पिछले करीब दो दशकों से अस्पताल की स्थिति लगातार खराब होती गई है। उन्होंने सरकार से जैंतगढ़ अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की मांग की।

वहीं, भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष राई भूमिज ने कहा कि स्वास्थ्य लोगों की बुनियादी जरूरत है। यदि सरकार मौजूदा व्यवस्था के तहत अस्पताल का संचालन करने में सक्षम नहीं है, तो इसे प्रखंड मुख्यालय के अधीन स्थानांतरित कर बेहतर तरीके से संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि कागजों पर अस्पताल चलाने से बेहतर है कि उसका धरातल पर लोगों को लाभ मिले।

राई भूमिज ने चेतावनी दी कि यदि जैंतगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था को जल्द दुरुस्त कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित नहीं किया गया, तो भाजपा सड़क से सदन तक आंदोलन करने को बाध्य होगी।

स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार मामले को गंभीरता से लेते हुए जैंतगढ़ अस्पताल में चिकित्सकों की नियुक्ति, पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती और जरूरी जांच व उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराए, ताकि आठ पंचायतों की बड़ी आबादी को अपने ही क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके।

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