Chaibasa (चाईबासा) : स्वर्ण विकास योजना की परिपक्व राशि का भुगतान नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा ने वेलफेयर बिल्डिंग एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, विशाखापत्तनम को शिकायतकर्ता को बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को 80 हजार रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना तथा मुकदमा खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अलग से देने को कहा गया है।
यह फैसला C.C. Case No. 25/2025 में सुनाया गया। मामले की संस्था तिथि 15 जुलाई 2025, अंतिम सुनवाई 10 सितंबर 2026 और आदेश के उच्चारण की तिथि 15 सितंबर 2026 है।
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नाबालिग बेटी के नाम पर लिया था बॉन्ड
मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के माटकोबेरा, पंड्रासाली निवासी शुरू बेसरा, पत्नी सत्रुघ्न बेसरा से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने अपनी नाबालिग पुत्री संजू कुमारी बेसरा के नाम पर वेलफेयर बिल्डिंग एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड की स्वर्ण विकास योजना के तहत 50 हजार रुपये का बॉन्ड संख्या 400609 लिया था।
शिकायत के अनुसार, कंपनी के एजेंट की सलाह पर 19 अगस्त 2009 को बॉन्ड लिया गया था और इसकी परिपक्वता तिथि 18 फरवरी 2015 निर्धारित थी। आरोप है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी कंपनी ने परिपक्व राशि और देय ब्याज का भुगतान नहीं किया।
कंपनी को नोटिस के बाद भी नहीं आया पक्ष
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने भुगतान के लिए कंपनी से कई बार संपर्क किया, लेकिन राशि का भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग की ओर से कंपनी को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद कंपनी की ओर से न तो उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा गया और न ही शो-कॉज दाखिल किया गया। इसके बाद आयोग ने कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही करते हुए शिकायतकर्ता को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया।
शुरू बेसरा ने शपथपत्र के माध्यम से अपना साक्ष्य प्रस्तुत किया। साथ ही 50 हजार रुपये के बॉन्ड की प्रति और कंपनी द्वारा प्राप्त दस्तावेज आयोग के समक्ष दाखिल किए गए।
आयोग ने सेवा में कमी माना
उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ता के साक्ष्य के आधार पर आयोग ने माना कि परिपक्व राशि का भुगतान नहीं किया जाना सेवा में कमी के दायरे में आता है।
सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से 20 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट भी प्रस्तुत किया गया था, जो शिकायतकर्ता को 6 जनवरी 2026 को दिया गया था। आयोग ने इस भुगतान को समायोजित करते हुए शेष 80 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।
26 दिसंबर 2017 से ब्याज देने का निर्देश
आयोग ने अपने आदेश में कंपनी को निर्देश दिया कि 80 हजार रुपये की राशि पर 26 दिसंबर 2017 से अंतिम भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान किया जाए।
इसके अलावा शिकायतकर्ता को हुई शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना तथा मुकदमा खर्च के लिए 10 हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया गया है।
आदेश के अनुसार, कंपनी को निर्णय की सूचना प्राप्त होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा। आदेश में लंबित आवेदन, यदि कोई हो, को भी निर्णय के अनुरूप निष्पादित मानने का निर्देश दिया गया है।








