जैंतगढ़। जमीयत अहले हदीस जैंतगढ़ की निगरानी में नव युवक संघ जैंतगढ़ द्वारा आयोजित चौथा अजीमुशान दीनी जलसा ऐतिहासिक रूप से सफल रहा। इस भव्य आयोजन में करीब 10 हजार से अधिक लोगों की भीड़ जुटी, जिसने इसे क्षेत्र के बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल कर दिया।
यह जलसा शाम 7 बजे शुरू होकर देर रात 2 बजे तक चला। कार्यक्रम की अध्यक्षता मरकजी जमीयत अहले हदीस के अमीर हजरत मौलाना असगर अली इमाम मेंहदी सल्फी मदनी ने की, जबकि संचालन जामा मस्जिद जैंतगढ़ के इमाम हजरत मौलाना रियाज़ सल्फी ने किया।

तिलावत और नात से हुआ आगाज
कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत-ए-क़ुरआन से हुई, जिसे हाफिज जानिसार सरफराज ने अपनी रूहानी आवाज में पेश किया। इसके बाद हाफिज मुदस्सर ने नात-ए-पाक सुनाकर माहौल को दीनी रंग में रंग दिया।
जन्नत और अकीदा पर विद्वानों के संबोधन
मुंबई से आए प्रसिद्ध मुबलिग हजरत मौलाना मुस्तफा अजमल मदनी सल्फी ने “जन्नत बुला रही है” विषय पर अपने संबोधन में कहा कि
“हर इंसान को जन्नत का तलबगार होना चाहिए, क्योंकि वह हमेशा की जिंदगी है, जहां न बीमारी होगी और न मौत।”
विजयबाड़ा से आए हजरत मौलाना अबू हुरैरा मदनी सल्फी ने “इस्लाह समाज में अकीदा का किरदार” विषय पर कहा कि
“दीन-ए-इस्लाम की बुनियाद तौहीद पर है और तौहीद का संबंध अकीदा से है। सही अकीदा के बिना इंसान सच्चा मोमिन नहीं बन सकता।”
गुनाहों से तौबा और सहाबा के मकाम पर जोर
जैंतगढ़ के उभरते आलिम हाफिज हंजला रफी ने लोगों को छोटे-छोटे गुनाहों से बचने और तौबा करने की नसीहत दी।
वहीं कर्नाटक से आए मो. याकूब जामई ने सहाबा के मकाम पर रोशनी डालते हुए कहा कि इस्लाम में सहाबा, ताबेईन और तबे-ताबेईन का विशेष दर्जा है।

शानदार व्यवस्थाएं और समापन
इस विशाल जलसे में शामिल हजारों लोगों के लिए खाने-पीने, चाय-नाश्ता, शरबत और लस्सी की बेहतरीन व्यवस्था की गई।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में नव युवक संघ जैंतगढ़ के लगभग 500 कार्यकर्ताओं का योगदान सराहनीय रहा।
अंत में सदर कमाल अहमद ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ जलसे का समापन किया।








