लिखित समझौता लागू कराने की मांग पर सारंडा में आंदोलन, रांजाबुरु खदान में चक्का जाम

सारंडा आंदोलन

गुवा संवाददाता। स्थानीय रोजगार और पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू कराने की मांग को लेकर सारंडा क्षेत्र में ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं का आंदोलन सोमवार से शुरू हो गया। सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले आंदोलनकारियों ने सेल की गुवा खदान के रांजाबुरु क्षेत्र में अनिश्चितकालीन आंदोलन के साथ चक्का जाम किया।

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रांजाबुरु खदान में उत्पादन और परिवहन प्रभावित

आंदोलन का नेतृत्व मानकी लागुड़ा देवगम और गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल कर रहे हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण और बेरोजगार युवा पारंपरिक हथियारों के साथ रांजाबुरु खदान पहुंचे। आंदोलनकारियों ने स्क्रीनिंग मशीन समेत खदान के विभिन्न संचालन क्षेत्रों को घेरकर कामकाज बाधित कर दिया।

चक्का जाम के कारण खदान में लौह अयस्क उत्पादन, डिस्पैच और माल ढुलाई प्रभावित होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू किए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार की मांग

मुखिया राजू सांडिल के अनुसार, पूर्व में दो बार आंदोलन और खदान बंदी के बाद सेल प्रबंधन, प्रशासन और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी। इस दौरान स्थानीय रोजगार समेत कई मांगों पर लिखित सहमति बनी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि समझौते के बावजूद मांगों का अपेक्षित स्तर पर क्रियान्वयन नहीं हुआ।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार, रैक लोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग में स्थानीय भागीदारी, प्रदूषण नियंत्रण तथा कारो नदी की सुरक्षा शामिल है।

ठोस निर्णय तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

ग्रामीणों ने ठेका कंपनी मां सरला पर बाहरी लोगों को रोजगार देने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राजू सांडिल ने कहा कि केवल आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ठोस निर्णय होने तक उत्पादन और ट्रांसपोर्टिंग बंद रखने की चेतावनी दी।

आंदोलन में विभिन्न गांवों के मुंडा, ग्रामीण और बेरोजगार युवा शामिल हैं। आंदोलन के कारण क्षेत्र में खनन और परिवहन गतिविधियों पर असर पड़ने की स्थिति बनी हुई है।

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