गुवा खदान आंदोलन सोमवार सुबह से उग्र रूप में सामने आया, जब सारंडा क्षेत्र के 12 गांवों के ग्रामीणों ने रोजगार की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू किया। करीब 100 ग्रामीणों ने मुंडा-मानकी नेतृत्व में सुबह 4 बजे से ही खदान क्षेत्र के मुख्य मार्गों को जाम कर दिया।
गुवा खदान आंदोलन का असर
इस गुवा खदान आंदोलन का सीधा असर खदान संचालन पर पड़ा। साइज स्क्रीन क्षेत्र, जीरो प्वाइंट और लोडिंग प्वाइंट तक जाने वाले रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए।
- पहली पाली की बसें रोक दी गईं
- उत्पादन और डिस्पैच ठप होने की स्थिति
- पूरे क्षेत्र में आवागमन बाधित
इससे खनन कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया और आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
गुवा सेल राजाबुरु खदान बंद: 10 गांवों का बड़ा आंदोलन

500 रोजगार की मांग क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने के कारण उन्हें यह गुवा खदान आंदोलन शुरू करना पड़ा।
उनकी मुख्य मांगें हैं:
- 500 बेरोजगारों को तत्काल रोजगार
- स्थानीय लोगों को प्राथमिकता
- लिखित समझौता

प्रबंधन और प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
सेल प्रबंधन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रस्ताव दिया:
- हर माह बैठक
- प्रत्येक गांव से 2–3 लोगों को रोजगार
हालांकि, आंदोलनकारियों ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

गुवा खदान आंदोलन पर वार्ता विफल
वार्ता के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक 500 रोजगार का लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, गुवा खदान आंदोलन जारी रहेगा।
क्षेत्र में तनाव की स्थिति
लगातार जारी गुवा खदान आंदोलन के कारण क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के प्रयास किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
गुवा खदान आंदोलन ने एक बार फिर स्थानीय रोजगार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर न केवल खदान संचालन बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।








