चाईबासा: बचत खाते से आधी रात कई UPI ट्रांजेक्शन के जरिए ₹48,765 की रकम निकल जाने के मामले में पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता आयोग ने कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने शिकायतकर्ता धनेश कुमार के पक्ष में फैसला देते हुए Canara Bank की जैन मार्केट शाखा को पूरी विवादित राशि वापस करने के साथ मानसिक परेशानी के लिए ₹15 हजार मुआवजा और मुकदमा खर्च के रूप में ₹10 हजार देने का आदेश दिया है। बैंक को कुल ₹73,765 की मौद्रिक राहत देनी होगी।
मोबाइल पर संदेश से चला खाते से रकम कटने का पता
शिकायत के अनुसार धनेश कुमार पिछले करीब आठ वर्षों से Canara Bank में बचत खाता संचालित कर रहे हैं। 3 अक्टूबर 2025 को मोबाइल पर बैंकिंग संदेश प्राप्त होने के बाद उन्हें जानकारी हुई कि उनके खाते से कई UPI लेनदेन के माध्यम से कुल ₹48,765 की राशि निकल गई है।
शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष कहा कि उन्होंने इनमें से किसी भी लेनदेन को अधिकृत नहीं किया था। जानकारी मिलते ही उन्होंने उसी दिन बैंक की शाखा में लिखित शिकायत देकर रकम वापस करने की मांग की। इसके बाद बैंक की शिकायत निवारण व्यवस्था के माध्यम से भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन विवादित राशि वापस नहीं की गई।
नोटिस के बाद भी बैंक ने नहीं रखा पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने बैंक को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। हालांकि, कई अवसर दिए जाने के बावजूद बैंक की ओर से आयोग के समक्ष उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई। इसके बाद 16 मार्च 2026 को मामले को बैंक के खिलाफ एकतरफा (Ex-parte) आगे बढ़ाया गया।
शिकायतकर्ता ने अपने दावे के समर्थन में बैंक स्टेटमेंट, मिनी स्टेटमेंट, बैंक को दी गई शिकायतों और विवादित UPI लेनदेन से संबंधित दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश किए।
Paytm और Google Pay का हवाला देकर बैंक जिम्मेदारी से नहीं बच सकता
आयोग ने फैसले में कहा कि बैंक की ओर से ऐसा कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि विवादित UPI लेनदेन शिकायतकर्ता ने स्वयं अधिकृत किए थे। बैंक ने संबंधित ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और प्रमाणीकरण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि लेनदेन UPI, Paytm या Google Pay के माध्यम से हुआ, बैंक अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। जब खाताधारक ने लेनदेन को अनधिकृत बताते हुए तत्काल बैंक को सूचना दी, तो शिकायत के प्रभावी निस्तारण की जिम्मेदारी भी बैंक की थी।
तत्काल शिकायत के बावजूद नहीं मिला समाधान
आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता ने खाते से हुई अनधिकृत निकासी की जानकारी मिलने के बाद उसी दिन बैंक को इसकी सूचना दी थी। बैंक के समक्ष की गई शिकायतों का रिकॉर्ड भी मामले में उपलब्ध था। इसके बावजूद बैंक की ओर से विवादित राशि वापस करने या शिकायत का प्रभावी समाधान करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
आयोग ने इसे सेवा में कमी माना और शिकायतकर्ता को मौद्रिक राहत देने का निर्णय सुनाया।
45 दिनों में करना होगा भुगतान
आयोग ने Canara Bank को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता के खाते में ₹48,765 की विवादित राशि वापस (री-क्रेडिट) करे। इसके अलावा मानसिक परेशानी एवं उत्पीड़न के लिए ₹15,000 तथा मुकदमा खर्च के रूप में ₹10,000 का भुगतान करना होगा।
बैंक को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर यह भुगतान करना होगा। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर बकाया राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
आयोग ने बैंक को विवादित लेनदेन के संबंध में खाते से आगे किसी प्रकार की राशि नहीं काटने का भी निर्देश दिया है।
फैसले की प्रमुख बातें
– ₹48,765 — खाते में वापस करने का आदेश
– ₹15,000 — मानसिक परेशानी एवं उत्पीड़न का मुआवजा
– ₹10,000 — मुकदमा खर्च
– ₹73,765 — कुल मौद्रिक राहत
– 45 दिन — भुगतान की समय सीमा
– 9 प्रतिशत — देरी होने पर वार्षिक ब्याजSEO Title: Canara Bank UPI Fraud Case: खाते से ₹48,765 गायब, उपभोक्ता आयोग ने बैंक को ₹73,765 देने का आदेश







