चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के कार्यालय में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब भवन के जर्जर छज्जे का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर पड़ा। घटना के वक्त कार्यालय में कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन संयोगवश कोई इसकी चपेट में नहीं आया। इससे एक बड़ा हादसा टल गया।
छज्जा गिरने की घटना के बाद कार्यालय में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। कर्मचारियों में भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि भवन की हालत लंबे समय से खराब है और कई हिस्सों से प्लास्टर टूटकर गिरने का खतरा बना हुआ है।
बारिश ने बढ़ाई परेशानी
लगातार बारिश और नमी के कारण भवन की स्थिति और खराब होती जा रही है। कार्यालय की बाहरी दीवारों और छज्जों पर जगह-जगह दरारें, सीलन और काई दिखाई दे रही है। कई हिस्सों में प्लास्टर उखड़ चुका है। अंदर की छत और दीवारों पर भी नमी के निशान हैं।
कर्मचारियों के अनुसार, बरसात के दौरान पानी का रिसाव होने से समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे में किसी भी कमजोर हिस्से के अचानक गिरने से कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कार्यालय में आने वाले उपभोक्ता, अधिवक्ता और अन्य लोग भी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं।
अधिकारियों को पहले दी जा चुकी है सूचना
बताया गया कि भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त और भवन निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों को पहले ही जानकारी दी जा चुकी है। भवन की मरम्मत और आवश्यक निर्माण कार्य कराने की मांग भी की गई थी। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष है।
कर्मचारियों का कहना है कि कार्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने उपभोक्ता मामलों के सिलसिले में पहुंचते हैं। ऐसे में भवन की सुरक्षा की अनदेखी किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
छत और दीवारों की हालत भी चिंताजनक
कार्यालय के भीतर कई जगह छत का प्लास्टर उखड़ा हुआ है। दीवारों पर सीलन के कारण जगह-जगह खराबी नजर आती है। बरसात के मौसम में नमी और पानी का रिसाव भवन की संरचना को और कमजोर कर सकता है।
छज्जा गिरने के बाद कर्मचारियों ने भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल गिरे हुए हिस्से की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे भवन की स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।

हादसे के बाद अब कार्रवाई का इंतजार
छज्जे का हिस्सा गिरने की घटना ने सरकारी कार्यालयों के जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का सवाल है कि आखिर किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन सक्रिय होगा या समय रहते सुरक्षा के उपाय किए जाएंगे।
कर्मचारियों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि भवन का तत्काल निरीक्षण कराकर खतरनाक हिस्सों की मरम्मत कराई जाए। यदि भवन पूरी तरह असुरक्षित पाया जाता है तो कर्मचारियों और आम लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कार्यालय को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने पर भी विचार किया जाए।
छज्जा गिरने की घटना ने एक बार फिर जर्जर सरकारी भवनों की मरम्मत और नियमित रखरखाव की जरूरत को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि घटना के बाद संबंधित विभाग कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।








