सरायकेला: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर केपी सोरेन ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खनन संशोधन कानून के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला
कहा कि इस जनविरोधी कानून के विरोध में आगामी 7 सितंबर को सरायकेला-खरसावां जिले के सभी प्रखंडों में पार्टी की ओर से व्यापक धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
प्रोफेसर केपी सोरेन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्ष 1957 से लागू खान एवं खनिज अधिनियम के तहत राज्य को मिलने वाली रॉयल्टी और अधिकार पूरी तरह सुरक्षित थे। इससे झारखंड की वित्तीय स्थिति संतुलित रहती थी और स्थानीय हितों की रक्षा होती थी। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया नया संशोधन कानून राज्य के अमन-चैन को बाधित करने और लोगों को भ्रमित करने वाला एक ‘काला कानून’ है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर यहां के मूल निवासियों का पहला अधिकार है। विशेष रूप से लघु खनिजों में स्थानीय लोगों की पूर्ववत भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
सोरेन ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर मजबूती से कार्य कर रही है, जबकि केंद्र सरकार ऐसे कानूनों के जरिए राज्य के अधिकारों में कटौती कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र ने इस संशोधन विधेयक को वापस नहीं लिया, तो पार्टी सड़क से सदन तक आंदोलन को और तेज करेगी। 7 सितंबर को सभी प्रखंड मुख्यालयों पर झामुमो कार्यकर्ता एकजुट होकर आवाज बुलंद करेंगे।







