New Delhi (नई दिल्ली) : पूर्वी भारत के व्यस्त रेल नेटवर्क को बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में रेलवे से जुड़ी तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। करीब 10,783 करोड़ रुपये की इन योजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर का विस्तार होगा।
इनमें झारखंड और ओडिशा से होकर गुजरने वाले महत्वपूर्ण खड़गपुर-झारसुगुड़ा रेलखंड पर चौथी लाइन का निर्माण प्रमुख है। यह रेलखंड हावड़ा-मुंबई मार्ग का अहम हिस्सा है और यहां अतिरिक्त ट्रैक बनने से ट्रेनों के संचालन के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध होगी।
खड़गपुर से झारसुगुड़ा तक बढ़ेगी क्षमता
रेलवे के इस हिस्से पर यात्री ट्रेनों के अलावा बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी चलती हैं। कोयला, लौह अयस्क, इस्पात और सीमेंट जैसे भारी माल की ढुलाई के कारण इस कॉरिडोर पर रेल यातायात का दबाव काफी रहता है।
चौथा ट्रैक बनने के बाद ट्रेनों को संचालित करने के लिए रेलवे के पास अतिरिक्त विकल्प होंगे। इससे यात्री और मालगाड़ियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से चलाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
टाटानगर इस रेल कॉरिडोर का महत्वपूर्ण स्टेशन है, लेकिन कैबिनेट की मंजूर परियोजना का आधिकारिक नाम खड़गपुर-झारसुगुड़ा चौथी लाइन है। इसलिए इसे सीधे “टाटानगर-झारसुगुड़ा चौथी लाइन” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।
तीन परियोजनाओं से 656 किमी रेल नेटवर्क बढ़ेगा
कैबिनेट से मंजूर योजनाओं में तीन प्रमुख रेल परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें—
– खड़गपुर-झारसुगुड़ा खंड में चौथी लाइन
– कटनी-पेंड्रा रोड खंड में चौथी लाइन
– बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड खंड में तीसरी लाइन का निर्माण किया जाएगा।
सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से मौजूदा रेल मार्गों की क्षमता बढ़ेगी और व्यस्त सेक्शनों पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
पांच राज्यों के 14 जिलों में पहुंचेगा असर
परियोजनाओं का दायरा पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक फैला है। सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 4,790 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लगभग 56 लाख लोगों को इसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
रेल लाइन बढ़ने का फायदा केवल रेल यात्रियों को ही नहीं मिलेगा। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले माल को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में भी अतिरिक्त रेल क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
हर साल 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की उम्मीद
रेलवे के लिए इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू माल परिवहन है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से इन मार्गों पर लगभग 27 मिलियन टन यानी 2.7 करोड़ टन सालाना अतिरिक्त माल यातायात संभालने की क्षमता विकसित होने की संभावना है।
इसका सीधा फायदा खनिज और औद्योगिक माल की आवाजाही को मिल सकता है। झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों के लिए यह रेल ढांचा विशेष महत्व रखता है।
सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर पर भी बढ़ेगी ट्रैक क्षमता
कैबिनेट बैठक के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे के बड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश के सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर को चार ट्रैक करने की दिशा में काम चल रहा है।
इन प्रमुख रेल मार्गों में गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के हिस्सों के साथ उसके दोनों डायगोनल और दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर को शामिल किया गया है।
इन मार्गों पर ट्रैक क्षमता बढ़ाने का उद्देश्य आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले यातायात को संभालना और रेल परिचालन को अधिक सुचारु बनाना है।
किन मार्गों पर बढ़ेगी चार ट्रैक की क्षमता?
हाई डेंसिटी कॉरिडोर के तहत प्रमुख मार्ग हैं—
दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता, कोलकाता-दिल्ली, दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-कोलकाता और दिल्ली-गुवाहाटी।
रेल मंत्रालय इन मार्गों पर चरणबद्ध तरीके से क्षमता विस्तार कर रहा है। लगभग 4,000 किलोमीटर के हिस्से के लिए DPR तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
हावड़ा-मुंबई रेल मार्ग को कितना फायदा?
खड़गपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन हावड़ा-मुंबई रेल कनेक्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चौथी लाइन बनने से इस मार्ग पर उपलब्ध ट्रैक क्षमता बढ़ेगी। इसका फायदा खासकर उस समय मिल सकता है जब यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों की संख्या बढ़ती है।
हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि नई लाइन बनते ही हावड़ा-मुंबई मार्ग पर जाम पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। लेकिन अतिरिक्त ट्रैक से ट्रेन संचालन में लचीलापन, समयबद्धता और क्षमता बेहतर होने की उम्मीद जरूर है।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक भी आसान होगी पहुंच
इन परियोजनाओं से कई धार्मिक और पर्यटन केंद्रों की रेल कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलने की संभावना है। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्रीक्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बंधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक, अचानकमार टाइगर रिजर्व और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं।
गति शक्ति के तहत मजबूत होगा रेल नेटवर्क
सरकार ने इन परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के व्यापक उद्देश्य से जोड़ा है। इसका लक्ष्य परिवहन नेटवर्क को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ना और यात्रियों के साथ-साथ माल की आवाजाही को अधिक प्रभावी बनाना है।
कुल मिलाकर, नई रेल लाइनों का निर्माण पूर्वी और मध्य भारत के औद्योगिक तथा यात्री रेल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण विस्तार माना जा रहा है। खड़गपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन पर चौथे ट्रैक के बाद आने वाले वर्षों में इस व्यस्त मार्ग की रेल क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।








