Chaibasa (चाईबासा) । आदिवासी हो समाज के महान दार्शनिक, साहित्यकार, नाटककार और वारंग क्षिति लिपि के खोजकर्ता ओतगुरु लाको बोदरा की 107वीं जयंती जामदा में समारोहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों के 40 से अधिक गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हो भाषा के लेखक, कवि, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और लाको बोदरा के अनुयायियों ने उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया।

समारोह का आयोजन आदिवासी हो समाज महासभा, ओडिशा की ओर से किया गया। इससे पहले जामदा शहर में ढोल-नगाड़ों की थाप और धार्मिक पताकाओं के साथ भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष और युवा शामिल हुए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मयूरभंज सांसद नभाचरण माझी, जसीपुर विधायक सह वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंह कुंटिया, करंजिया विधायक पदमाचरण हाईबुरू, रायरंगपुर विधायक जोलेन बारदा तथा हो साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली मौजूद रहे।
वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंह कुंटिया ने कहा कि लाको बोदरा ने हो समाज को अपनी लिपि देकर भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि वारंग क्षिति लिपि हो समाज की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की आवश्यकता है।

रायरंगपुर विधायक जोलेन बारदा ने हो भाषा और लिपि के विकास के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि लाको बोदरा की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।
करंजिया विधायक पदमाचरण हाईबुरू ने लाको बोदरा के आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हो समाज के बीच उनके विचार आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
वहीं, हो साहित्यकार डोबरो बुड़ीउली ने लाको बोदरा के जीवन, संघर्ष और साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में लाको बोदरा का योगदान हो समाज के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।
समारोह में एंकर चंद्रिका कोडांकेल, मलोती आल्डा, पूनम पुरती, सतीश सामड, बिरसा कोडांकेल, मनोरंजन तिरिया, सेलाय पुरती सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
http://आदिवासी “हो” समाज युवा महासभा ने मनाया ओत गुरू कोल लाको बोदरा का पुण्य तिथि








