जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर स्थित अरका जैन यूनिवर्सिटी (AJU) में मंगलवार को छह दिवसीय उद्यमिता विकास शिविर (EDP) का शुभारंभ हुआ। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा प्रायोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी विश्वविद्यालय के फैशन डिजाइन विभाग एवं स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज की ओर से की जा रही है। इसका उद्देश्य झारखंड के शिल्पकारों और कारीगरों को उद्यमिता, मार्केटिंग, वित्त, बैंकिंग और निर्यात से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर छात्राओं ने आकर्षक स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। वस्त्र मंत्रालय (हस्तशिल्प) के क्षेत्रीय निदेशक संदीप कुमार, टाटा स्टील फाउंडेशन की प्रतिनिधि स्मिता वर्मा तथा विश्वविद्यालय के प्रो वाइस-चांसलर डॉ. अंगद तिवारी समेत कई शिक्षाविद एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
अतिथियों ने शिल्पकारों को स्थानीय कला और पारंपरिक हुनर के साथ आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि उचित प्रशिक्षण के माध्यम से कारीगर अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकते हैं।

सरकारी योजनाओं से लेकर निर्यात तक की जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को सरकारी योजनाओं, जीएसटी, बैंकिंग व्यवस्था और उद्यम संचालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। संदीप कुमार ने सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और वित्तीय प्रक्रियाओं को समझने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं स्मिता वर्मा ने महिला उद्यमियों की भूमिका और उनकी संभावनाओं को रेखांकित किया।
डॉ. अंगद तिवारी ने भारतीय ज्ञान प्रणाली और स्थानीय कला की समृद्ध परंपरा को आधुनिक उद्यमिता से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय शिल्प को व्यापक बाजार और वैश्विक पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।
10 अक्टूबर तक होंगे तकनीकी सत्र
कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट ब्लॉक में किया जा रहा है और प्रशिक्षण कार्यक्रम 10 अक्टूबर तक चलेगा। छह दिनों के दौरान मार्केटिंग, डिजाइन, वित्त एवं बैंकिंग, उद्यम विकास, निर्यात प्रबंधन और डिजाइन इनोवेशन जैसे विषयों पर अलग-अलग तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य शिल्पकारों को केवल प्रशिक्षण देना ही नहीं, बल्कि उन्हें बदलते बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और उनके पारंपरिक हुनर को टिकाऊ उद्यम में बदलने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना है। कारीगरों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।








