सरायकेला, 8 अक्टूबर। ऑनलाइन मोबाइल खरीदने के बाद भुगतान की गई राशि के बावजूद उत्पाद की डिलीवरी नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, सरायकेला-खरसावां ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने संबंधित कंपनी को उपभोक्ता को कुल ₹42,470 का भुगतान करने का आदेश दिया है। मामले में आयोग ने कंपनी की सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) माना है।
मामला उपभोक्ता वाद संख्या 1/2026 से संबंधित है। आदित्यपुर-2, जमशेदपुर निवासी अजीत कुमार सिंह, पिता लल्लन सिंह ने ग्रीन वेब सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड, देवास (मध्य प्रदेश) के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।
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₹2,470 भुगतान के बाद भी नहीं मिला मोबाइल
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने 6 दिसंबर 2025 को संबंधित वेबसाइट से ₹2,470 में मोबाइल फोन का ऑर्डर किया था और Paytm UPI के माध्यम से भुगतान किया था। कंपनी ने सात दिनों के भीतर मोबाइल की डिलीवरी का आश्वासन दिया था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी उत्पाद नहीं पहुंचा।
शिकायतकर्ता ने कंपनी से कई बार संपर्क कर मोबाइल की डिलीवरी या भुगतान की राशि वापस करने की मांग की। इसके बावजूद 25 फरवरी 2026 तक न तो मोबाइल मिला और न ही राशि वापस की गई। ई-मेल के माध्यम से संपर्क करने के बाद भी कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
नोटिस के बावजूद आयोग में उपस्थित नहीं हुई कंपनी
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने विपक्षी कंपनी को नोटिस जारी किया। नोटिस की तामील के बावजूद कंपनी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद आयोग ने 30 जुलाई 2026 के आदेश से मामले की सुनवाई एकतरफा (Ex-parte) करने का निर्णय लिया।
शिकायतकर्ता ने शपथ-पत्र, भुगतान की रसीद, ई-मेल संवाद और अन्य दस्तावेज आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए। आयोग ने इन साक्ष्यों के आधार पर माना कि शिकायतकर्ता ने मोबाइल के लिए राशि का भुगतान किया था, लेकिन कंपनी ने न तो मोबाइल उपलब्ध कराया और न ही राशि वापस की।
45 दिनों में देना होगा ₹42,470
आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, सदस्य प्रदीप कुमार मिश्रा एवं सदस्य संजीव/संजू शाही की पीठ ने कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को ₹2,470 मूल राशि, ₹30,000 मानसिक एवं आर्थिक परेशानी के मुआवजे और ₹10,000 मुकदमा खर्च के रूप में भुगतान करे।
इस तरह कंपनी को कुल ₹42,470 का भुगतान करना होगा। आयोग ने आदेश पारित होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
देरी पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज
आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर राशि विधि सम्मत प्रक्रिया से वसूल की जाएगी। साथ ही बकाया राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी वसूली की तिथि तक देय होगा।






