Jamshedpur (जमशेदपुर): उत्पादन का कोई भी लक्ष्य या मुनाफा इंसान की अनमोल जिंदगी से बढ़कर नहीं हो सकता। इसी मजबूत संदेश के साथ सोमवार को जमशेदपुर में सीआईआई (CII) झारखंड के 7वें दो दिवसीय ‘सेफ्टी टॉक 2026’ का आगाज हुआ।

टाटा स्टील को झारखंड विद्युत नियामक आयोग का झटका, 11.82 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश
50 से अधिक सुरक्षा स्टॉल्स और 250 से ज्यादा विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुए इस सम्मेलन में उद्योग जगत के दिग्गजों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा को महज कागजी खानापूर्ति (कंप्लायंस) से निकालकर बोर्डरूम की रणनीतिक प्राथमिकता और व्यावहारिक संस्कृति बनाना होगा।

सीआईआई पूर्वी क्षेत्र सुरक्षा उपसमिति के चेयरमैन व टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी) राजीव मंगल ने उद्योगों का आह्वान करते हुए कहा कि केवल जीरो-एलटीआई के आंकड़ों पर संतोष करने के बजाय कंपनियों को सक्रिय रोकथाम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने भारी वाहनों में प्रॉक्सिमिटी सेंसर और रनिंग मशीनों के लिए पॉजिटिव आइसोलेशन जैसे तकनीकी समाधानों को गैर-समझौतावादी व्यवस्था के रूप में लागू करने पर जोर दिया।

सीआईआई झारखंड राज्य परिषद के चेयरमैन दिलू पारिख ने दुनिया भर में कार्यस्थल हादसों से होने वाली मौतों और वैश्विक जीडीपी के नुकसान को रेखांकित करते हुए कहा कि सुरक्षा पर किया गया निवेश तीन गुना रिटर्न देता है। वहीं, टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) डी बी सुंदरा रामम ने सुरक्षा को एक स्वाभाविक संस्कार बनाने की वकालत की। उन्होंने कारखानों के साथ-साथ सड़क हादसों से श्रमिकों को बचाने के लिए 24 घंटे की सुरक्षा दृष्टि अपनाने पर बल दिया।
टाटा स्टील के चीफ सेफ्टी नीरज कुमार सिन्हा ने जोर देकर कहा कि नियम फाइलों में नहीं, बल्कि सीधे वर्कप्लेस पर लागू होने चाहिए, ताकि कर्मचारी शाम को सुरक्षित घर लौटें। टाटा स्टील यूआईएसएल के एमडी अतुल भटनागर ने स्पष्ट किया कि ऑडिट कागजों को बचाता है, लेकिन जमीनी सुरक्षा नियंत्रण इंसान की जान बचाते हैं।
सम्मेलन के विशेष सीईओ सत्र में कपिल मोदी, यू के सिंह, स्वास्तिका बसु, दिनेश सोंथालिया, हर्ष बंसल, अजितेश मोंगा और सरोज बनर्जी जैसे उद्योग प्रमुखों ने भी सुरक्षा को बोर्डरूम की मुख्य रणनीति बनाने पर मंथन किया।







