आदित्यपुर-जुगसलाई के बीच रेलवे पुल पर कथित स्क्रैप चोरी से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, राधा स्वामी मार्ग से गुजरने वालों पर भी मंडरा रहा खतरा
Adityapur (आदित्यपुर)। आदित्यपुर और जुगसलाई के बीच खरकई नदी पर बने रेलवे ब्रिज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि रेलवे पुल पर खड़ी मालगाड़ियों से लोहे का सामान काटकर नीचे गिराने का कथित खेल लंबे समय से चल रहा है। बीते शनिवार देर रात करीब 12:30 बजे हुई एक घटना ने इस मामले की गंभीरता को सामने ला दिया।
बताया जा रहा है कि राममढ़ैया बस्ती के समीप रेलवे पुल पर खड़ी मालगाड़ी से कथित तौर पर लोहे की चादरें काटकर नीचे गिराई जा रही थीं। इसी दौरान एक भारी लोहे की चादर नीचे से गुजर रहे 11,000 वोल्ट (11KV) हाईटेंशन तार पर जा गिरी। इसके बाद जोरदार धमाका हुआ और बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।
11KV तार पर गिरी लोहे की चादर, कई इलाकों में बिजली गुल
घटना के बाद जुगसलाई फीडर समेत आदित्यपुर के कई रिहायशी इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की बात सामने आई। रात के समय अचानक बिजली गुल होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बिजली विभाग की तकनीकी टीम जब खराबी का पता लगाने के लिए पेट्रोलिंग पर निकली, तब पुल के नीचे लोहे की चादर और कथित स्क्रैप चोरी से जुड़ी गतिविधि का मामला सामने आने की जानकारी मिली।
यह घटना कई सवाल खड़े करती है। अगर रेलवे पुल पर मालगाड़ी से लोहे का सामान काटकर नीचे गिराया जा रहा था, तो वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? क्या रेलवे ट्रैक और मालगाड़ियों की नियमित निगरानी हो रही है?
पहले भी जान गंवा चुके हैं युवक
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, स्क्रैप चोरी के दौरान हाईटेंशन तार की चपेट में आने से पहले भी हादसे हो चुके हैं। करीब तीन वर्ष पूर्व छठ पर्व के दौरान एक युवक के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से मौत की घटना का उल्लेख किया जा रहा है। इसके अलावा लोहे की चोरी और उसे नीचे गिराने से जुड़ी एक अन्य घटना में भी युवक की जान जाने की बात कही जा रही है।
ऐसे में ताजा घटना ने पुराने हादसों की याद ताजा कर दी है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
राधा स्वामी मार्ग पर मंडरा रहा खतरा
रेलवे ब्रिज के नीचे 32 नंबर राधा स्वामी मार्ग है। इस सड़क से दिन-रात पैदल राहगीर, मजदूर और वाहन गुजरते हैं। ऐसे में यदि पुल से कई सौ किलो वजन की लोहे की चादर या कोई अन्य भारी वस्तु नीचे गिरती है तो बड़ा हादसा हो सकता है।
खास बात यह है कि इस बार लोहे की चादर के 11KV तार पर गिरने से बिजली आपूर्ति बाधित हुई। यदि यही चादर किसी व्यक्ति या वाहन पर गिरती तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकता था।
RPF की निगरानी पर उठ रहे सवाल
घटना के बाद रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। रेलवे क्षेत्र में मालगाड़ी से कथित तौर पर लोहे की चादर काटने जैसी गतिविधि को अंजाम देना कोई सामान्य घटना नहीं है।
ऐसे में सवाल उठता है कि रेलवे पुल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है? क्या वहां नियमित पेट्रोलिंग होती है? यदि होती है तो कथित स्क्रैप चोरी करने वाले लोग इतनी आसानी से गतिविधियों को कैसे अंजाम दे पा रहे हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे और RPF को मामले की गंभीरता से जांच कर यह पता लगाना चाहिए कि इस कथित स्क्रैप चोरी के पीछे कौन लोग हैं और चोरी का सामान कहां पहुंचाया जाता है।
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार?
खरकई रेलवे ब्रिज की घटना केवल रेलवे संपत्ति की सुरक्षा का मामला नहीं है। इससे रेलवे परिचालन, बिजली व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा भी सीधे जुड़ी हुई है।
यदि पुल से लोहे के भारी टुकड़े नीचे गिरते हैं तो यह किसी भी समय जानलेवा हादसे का कारण बन सकते हैं। ऐसे में सवाल यही है कि RPF और रेलवे प्रशासन की नींद आखिर कब टूटेगी? क्या किसी बड़े हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को सख्त किया जाएगा या उससे पहले ही कथित स्क्रैप चोरी के नेटवर्क पर कार्रवाई होगी?
रेलवे प्रशासन से मांग है कि पूरे मामले की जांच कर पुल और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए तथा यदि चोरी के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।








