Adityapur: एस-टाइप दुर्गा पूजा मैदान सौंदर्यीकरण विवाद: पार्षद और प्रतिनिधि का दो टूक बयान—‘हर हाल में हटेगा अतिक्रमण, पूरा होगा विकास कार्य’

एस-टाइप मैदान

आदित्यपुर: आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 22 स्थित ऐतिहासिक एस-टाइप दुर्गा पूजा मैदान के सौंदर्यीकरण और विकास कार्य के लिए जारी करीब 80 लाख रुपये के टेंडर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर स्थानीय लोगों के एक समूह ने टेंडर रद्द करने की मांग की है, वहीं स्थानीय पार्षद अंजू सिंह और पार्षद प्रतिनिधि सह सामाजिक कार्यकर्ता संजीव सिंह बबुआ ने योजना का समर्थन करते हुए विरोध करने वालों पर सवाल उठाए हैं।

पार्षद बोलीं- मैदान का होगा कायाकल्प

वार्ड पार्षद अंजू सिंह ने कहा कि कुछ लोग गलतफहमी और निजी स्वार्थ के कारण विकास कार्य का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता के सहयोग से एस-टाइप मैदान का कायाकल्प किया जा रहा है, ताकि इसका बेहतर उपयोग बच्चों और बुजुर्गों समेत आम लोगों के लिए हो सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मैदान से अतिक्रमण हर हाल में हटाया जाएगा और विकास योजना को रद्द नहीं होने दिया जाएगा। उनके अनुसार, मैदान के व्यवस्थित विकास से स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

कब्जे को लेकर संजीव सिंह बबुआ का आरोप

पार्षद प्रतिनिधि संजीव सिंह बबुआ ने आरोप लगाया कि मैदान के पिछले हिस्से में कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। उनके अनुसार, वहां गाड़ियां, ट्रैक्टर, मिट्टी और लोहे का मलबा जमा किए जाने से रास्ता भी बाधित है। उन्होंने दावा किया कि मैदान का सौंदर्यीकरण होने के बाद कब्जा हटने की आशंका के कारण कुछ लोग योजना का विरोध कर रहे हैं।

बबुआ ने बताया कि प्रस्तावित विकास कार्यों में बास्केटबॉल कोर्ट, मिट्टी भराव, पेयजल की सुविधा और शौचालय का निर्माण शामिल है। उन्होंने कहा कि मैदान आम जनता के उपयोग के लिए खुला रहेगा और शादी-विवाह समेत सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

योजना रद्द हुई तो आंदोलन की चेतावनी

संजीव सिंह बबुआ ने कहा कि विकास कार्य जनहित में है और इसे किसी निजी स्वार्थ के कारण बाधित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मैदान के विकास की योजना को रद्द करने का प्रयास किया गया तो वार्ड स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

गौरतलब है कि मंगलवार को ‘सिंहभूम बॉयज क्रिकेट क्लब’ के बैनर तले स्थानीय लोगों ने नगर निगम कार्यालय पहुंचकर टेंडर रद्द करने की मांग की थी। इसके बाद मैदान के भविष्य और प्रस्तावित विकास योजना को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

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