Adityapur Shiv Bhajan of Mithila Sankirtan Mandal:आदित्यपुर में मिथिला संकीर्तन मंडली की शिव भजन संध्या, रघुवर दास हुए शामिल

Adityapur: आदित्यपुर में शनिवार शाम श्रद्धा और भक्ति से सराबोर माहौल देखने को मिला, जब मिथिला संकीर्तन मंडली द्वारा शिव भजन संध्या का आयोजन किया गया।

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रघुवर दास का पारंपरिक तरीके से स्वागत करते अध्यक्ष रंजीत नारायण मिश्रा

आदित्यपुर 2 के मार्ग संख्या 7/8 स्थित वीर कुंवर सिंह मैदान में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम की विशेषता रही झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास की मौजूदगी, जिन्होंने बतौर मुख्य अतिथि शामिल होकर आयोजन की शोभा बढ़ाई।

पाग पहनाकर हुआ अभिनंदन


मंडली के अध्यक्ष रंजीत नारायण मिश्र ने परंपरागत मिथिला शैली में पाग पहनाकर रघुवर दास का स्वागत किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में रघुवर दास ने कहा कि मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर भारतीय इतिहास का गौरव है। मिथिला की सभ्यता, भाषा और परंपरा इतनी समृद्ध है कि उसने देश को अनेक क्षेत्रों में नई दिशा दी है। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज को एकजुट करने और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं।

देर रात तक गूंजे भक्ति रस के गीत

शिव भजन संध्या देर रात तक चली। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। कभी तालियों की गड़गड़ाहट से तो कभी “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा मैदान गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से झूमते हुए भजनों का आनंद लिया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या ने उपस्थित होकर आयोजन को विशेष बना दिया।

1963 से निरंतर चली आ रही परंपरा

गौरतलब है कि मिथिला संकीर्तन मंडली की स्थापना 27 दिसंबर 1963 को हुई थी। मंडली की परंपरा है कि इसके सभी सदस्य प्रतिवर्ष अनंत चतुर्दशी के दिन बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए प्रस्थान करते हैं। उसी उपलक्ष्य में शिव भजन संध्या का आयोजन हर साल किया जाता है। इस परंपरा को निभाते हुए मंडली के सदस्य न केवल धार्मिक आस्था व्यक्त करते हैं बल्कि समाज में सांस्कृतिक जागरूकता भी फैलाते हैं।

उत्साह और सहयोग से बनी सफलता

इस बार के आयोजन को सफल बनाने में मंडली के अध्यक्ष रंजीत नारायण मिश्र के साथ-साथ उनके सहयोगी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मंच व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक, हर पहलू पर ध्यान दिया गया। परिणामस्वरूप, आयोजन पूरी तरह सफल और यादगार बन गया।

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव का संगम

आदित्यपुर में आयोजित यह भजन संध्या केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संगम भी थी। रघुवर दास की मौजूदगी ने आयोजन को और भी ऐतिहासिक बना दिया। श्रद्धालुओं ने इसे आत्मिक शांति और भक्ति का अद्भुत अनुभव बताया।

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