चाईबासा सड़क भ्रष्टाचार मामला इन दिनों शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। Chaibasa नगर परिषद् के वार्ड 05 में 20 दिसंबर 2025 को बनी पीसीसी सड़क महज तीन महीने में ही उखड़ने लगी है। यह घटना न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा करती है।
तीन महीने में बदहाल सड़क
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस सड़क को “गुणवत्तापूर्ण निर्माण” बताकर पेश किया गया था, वह बेहद कम समय में ही टूटकर गड्ढों में बदल गई। यह स्थिति दर्शाती है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और लापरवाही बरती गई है। सड़क की वर्तमान हालत देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि यह विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुकी है।
प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल
नगर परिषद् के कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यकाल में हुए इस निर्माण को लेकर जनता में आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि इस अवधि में “काम कम और दिखावा ज्यादा” हुआ है। गुणवत्ता की अनदेखी, ठेकेदारों के साथ मिलीभगत और जवाबदेही की कमी जैसे मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं।
जनता के सवाल, प्रशासन खामोश
स्थानीय नागरिक अब सीधे सवाल उठा रहे हैं:
- किस इंजीनियर ने इस निर्माण को पास किया?
- क्या गुणवत्ता जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई है?
- शिकायतों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा?
इन सवालों का अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है, जिससे लोगों में असंतोष और बढ़ रहा है।
अन्य विकास कार्य भी विवादों में
सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यकाल में कई अन्य परियोजनाएं भी विवादों में रही हैं। शहर में लगाए गए हाई मास्क लाइट और स्ट्रीट लाइट की कीमतों को लेकर भी सवाल उठे हैं। साथ ही, शहर में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर भी प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच की मांग तेज
चाईबासा की जनता अब मांग कर रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मान लिया जाएगा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार है।
निष्कर्ष
चाईबासा सड़क भ्रष्टाचार मामला अब केवल एक सड़क तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है। यदि इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है।








