Chaibasa (चाईबासा) : पश्चिमी सिंहभूम और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में एक दंतैल हाथी मौत का तांडव मचा रहा है। पिछले 11 दिनों से जारी इस आतंक में अब तक कुल 22 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। आलम यह है कि गुजरात, असम और ओडिशा से आए विशेषज्ञ और अत्याधुनिक ड्रोन कैमरे भी इस गजराज को ट्रैक करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। झारखंड और ओडिशा की संयुक्त टीम पिछले 72 घंटों से बॉर्डर पर डेरा डाले हुए है, लेकिन हाथी का कोई सुराग नहीं मिल रहा।

बेनीसागर में 12 घंटे तक जमा रहा हाथी, फिर चकमा देकर हुआ फरार
शुक्रवार (9 जनवरी) को बेनीसागर इलाके में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी। दंतैल हाथी करीब 12 घंटे तक एक ही स्थान पर खड़ा रहा। वन विभाग ने उसे ट्रैकुलाइज (बेहोश) करने की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन तकनीकी बाधाओं और हाथी की चालाकी के कारण वह ओडिशा के घने काजू बागानों की ओर निकल गया। तब से लेकर अब तक हाथी विशेषज्ञों की नजरों से ओझल है। वर्तमान में एक्सपर्ट्स की टीम नोवामुंडी में कैंप कर रही है और हाथी की अगली लोकेशन का इंतजार कर रही है।
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खौफ के साये में ग्रामीण: पक्के मकान बने शरणस्थली
बेनीसागर और खड़पोस जैसे गांवों में दहशत इस कदर व्याप्त है कि लोगों ने अपने घरों में सोना छोड़ दिया है।
- सामूहिक सुरक्षा: गांव के सुरक्षित और पक्के मकानों में 15 से 20 लोग एक साथ रात गुजार रहे हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।
- रतजगा कर रहे पुरुष: हाथी के अचानक हमले से बचने के लिए गांव के पुरुष हाथों में मशाल और टॉर्च लेकर पूरी रात पहरेदारी कर रहे हैं।
- हालिया त्रासदी: बीते तीन दिनों में इसी क्षेत्र के दो ग्रामीणों समेत तीन लोगों को हाथी ने कुचलकर मार डाला है, जिससे गुस्सा और डर दोनों चरम पर हैं।

30 गांवों में ‘हाई अलर्ट’, अफवाहों ने बढ़ाई चुनौती
चाईबासा डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि बेनीसागर और खड़पोस में वन विभाग की तीन टीमें और SOS की टीम मुस्तैद है। हालांकि, हाथी की सही लोकेशन न मिलने के कारण सर्च ऑपरेशन में दिक्कतें आ रही हैं। डीएफओ के अनुसार, अलग-अलग जगहों से हाथी दिखने की सूचनाएं मिल रही हैं, लेकिन सत्यापन करने पर वे महज अफवाहें साबित हो रही हैं। वर्तमान में बॉर्डर के करीब 30 गांव हाई अलर्ट पर हैं।

संवेदनशील इलाकों की सूची:
- बेनीसागर (मझगांव) – जहां हाल ही में मौतें हुई हैं।
- खड़पोस – सुरक्षा बलों का मुख्य निगरानी केंद्र।
- नोवामुंडी सीमा – विशेषज्ञों का बेस कैंप और संभावित मूवमेंट एरिया।
- ओडिशा बॉर्डर के काजू बागान – हाथी के छिपने का मुख्य ठिकाना।
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वन विभाग की अपील: ग्रामीणों से अनुरोध है कि वे रात के समय अकेले बाहर न निकलें, हाथियों के साथ सेल्फी लेने या उन्हें छेड़ने की कोशिश न करें और किसी भी सूचना पर तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित करें।

