चांडिल डैम विस्थापितों की हुंकार: पुनर्वास नीति और बकाए मुआवजे के लिए तेज होगा आंदोलन

चांडिल डैम विस्थापितों की हुंकार

चांडिल: चांडिल बाँध विस्थापितों के हक, अधिकार और स्थायी समाधान को लेकर विस्थापित संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ‘चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच’ के बैनर तले विस्थापित गांवों में जनसंवाद और जनजागरण अभियान का पहला चरण पूरा कर लिया गया है, जिसके बाद अब दूसरे चरण में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

चांडिल डैम विस्थापितों की हुंकार

​विस्थापित गांवों का दौरा और नीति लागू करने की मांग

चांडिल बाँध विस्थापित मतस्यजीवी स्वालंबी सहकारी समिति के अध्यक्ष नारायण गोप ने बताया कि अगस्त 25 से 27 तारीख तक चले पहले चरण के दौरे में 20 विस्थापित गांवों से संवाद किया गया है। कुल 116 विस्थापित गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों तक आवाज पहुंचाने के लिए समीक्षा बैठक की गई है। आगामी 7 सितंबर से 12 तारीख तक अभियान का दूसरा चरण चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 40 वर्षों के संघर्ष के बाद वर्ष 2003 और 2012 की पुनर्वास नीति में संशोधन तो हुआ, लेकिन सरकार ने इसे धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं किया है। सरकार द्वारा घोषित विस्थापित एवं पुनर्वास आयोग को जल्द ज़मीन पर उतारने की मांग की गई है।

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​पूर्ण डूबी क्षेत्र घोषित करने और राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की मांग

मंच के सचिव श्यामल मार्डी ने कहा कि हुडलुंग से हाड़ात गांव तक निकाली गई संवाद यात्रा को ग्रामीणों का भारी समर्थन मिला है। उन्होंने मांग की कि जिन गांवों की पूरी कृषि भूमि डूब चुकी है, उन्हें ‘पूर्ण डूबी क्षेत्र’ घोषित किया जाए। जब तक शत-प्रतिशत मुआवजा नहीं मिलता, गांवों को डूब में न धकेला जाए। 44 साल बीतने के बाद भी पुनर्वास स्थलों पर लोगों की जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं है। जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र के लिए पुराने कागजातों हेतु चाईबासा के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो विस्थापित समाज व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

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