Chaibasa (चाईबासा) : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगलों में सुरक्षा बलों ने अब तक के सबसे बड़े और निर्णायक नक्सल विरोधी अभियान को अंजाम दिया है। पिछले दो दिनों से जारी भीषण मुठभेड़ में कुल 17 नक्सलियों के मारे जाने की देर रात आधिकारिक पुष्टि हो गई है। इस कार्रवाई को राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी सैन्य सफलताओं में से एक माना जा रहा है।
एसडीपीओ अजय केरकेट्टा ने बताया कि मारे गए सभी नक्सलियों के शव जंगल के अलग-अलग इलाकों से बरामद कर लिए गए हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए भेजे जा रहे हैं। सुरक्षा कारणों से यह कार्रवाई मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शुक्रवार देर रात पूरी कर ली गई है।

कुख्यात नक्सली पतिराम मांझी उर्फ ‘अनल दा’ का अंत
किरीबुरू के एसडीपीओ अजय केरकेट्टा ने जानकारी दी कि मारे गए नक्सलियों में 1 करोड़ रुपये का इनामी और कुख्यात नक्सली नेता पतिराम मांझी उर्फ अनल दा भी शामिल है। अनल दा 100 से अधिक नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड था और झारखंड व ओडिशा दोनों राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।

भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद
सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- AK-47 राइफलें
- भारी मात्रा में जिंदा कारतूस
- नक्सली साहित्य और दैनिक उपयोग की सामग्री
मुठभेड़ के बाद शुक्रवार देर रात मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में सभी नक्सलियों के शवों को जंगल से बाहर निकाला गया। मारे गए नक्सलियों में कई अन्य शीर्ष नेता भी शामिल हैं जिन पर लाखों के इनाम घोषित थे।
”यह कार्रवाई सारंडा क्षेत्र में शांति और विकास के नए युग की शुरुआत करेगी। हमने नक्सलियों के गढ़ को ध्वस्त कर दिया है। अब क्षेत्र में सड़क और बुनियादी ढांचों का काम बिना किसी डर के हो सकेगा।”
— अजय केरकेट्टा, एसडीपीओ, किरीबुरू

आत्मसमर्पण की अपील
प्रशासन ने बचे हुए नक्सलियों को चेतावनी दी है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं और सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाएं। एसडीपीओ ने स्पष्ट किया कि यदि नक्सली आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो सुरक्षा बलों का यह कड़ा अभियान आगे भी जारी रहेगा।
विकास को मिलेगी गति
सारंडा का जंगल लंबे समय से विकास कार्यों में बाधा बना हुआ था। इस बड़ी सफलता के बाद प्रशासन को उम्मीद है कि अब सुदूर ग्रामीण इलाकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंच सकेगा और नक्सल हिंसा से आम लोगों को स्थायी राहत मिलेगी।








